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चौपाल: राजनीति में युवा

आज देश को स्वच्छ, स्वस्थ और मूल्यों वाली राजनीति की जरूरत है, पर यह तभी संभव है जब वंशवाद, धनबल और बाहुबल वाले लोगों के राजनीति में वर्चस्व को तोड़ा जाए तथा युवाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। युवा नेता विशाल युवा आबादी वाले भारत की जरूरतों और ख्वाहिशों को बखूबी समझते हैं।

Author August 31, 2018 2:12 AM
रायपुर के युवा जिला कलेक्टर ओपी चौधरी के इस्तीफा देकर राजनीति में आने के फैसले ने उस भारतीय समाज के सामने मिसाल पेश की है।(फाइल फोटो)

रायपुर के युवा जिला कलेक्टर ओपी चौधरी के इस्तीफा देकर राजनीति में आने के फैसले ने उस भारतीय समाज के सामने मिसाल पेश की है, जो राजनीति को अछूत व संकीर्ण नजरिए से देखता है। इससे राजनीति के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाली युवा पीढ़ी की धारणा बदलेगी और आइआइटी, आइआइएम या देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा पा रहे कई ऐसे युवा जो राजनीति में प्रवेश के अक्सर अनिच्छुक दिखाई देते हैं, उन्हें भी राजनीति में आने की प्रेरणा मिलेगी।

आज देश को स्वच्छ, स्वस्थ और मूल्यों वाली राजनीति की जरूरत है, पर यह तभी संभव है जब वंशवाद, धनबल और बाहुबल वाले लोगों के राजनीति में वर्चस्व को तोड़ा जाए तथा युवाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले। युवा नेता विशाल युवा आबादी वाले भारत की जरूरतों और ख्वाहिशों को बखूबी समझते हैं। राजनीति में अगर ज्यादा ईमानदार, कर्मठ, प्रतिभाशाली तथा जागरूक उच्च शिक्षित युवा आए, जिनके पास विजन एवं ज्ञान हो, तो उनकी सोच व सामर्थ्य का अधिकतम प्रयोग हो सकेगा। यह हमारी मौजूदा राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे न केवल राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण, धनबल व बाहुबल पर काफी हद तक रोक लगेगी बल्कि भारतीय लोकतंत्र को भी मजबूत बनाने में मदद मिल सकेगी।

प्रत्येक सरकारी पद के लिए योग्यता के मानदंड हैं, उसी तर्ज पर राजनीति में भी योग्यता का मानदंड होना चाहिए। सांसद व विधायक बनने की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक हो और उनका कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हो। साथ ही राजनेताओं की सेवानिवृत्ति की आयु भी तय की जाए। ऐसा करना इसलिए जरूरी है कि अक्सर पार्टियों के बुजुर्ग नेता अपना पद नहीं छोड़ना चाहते। कई राजनेता तो बीमार, बुजुर्ग, शारीरिक रूप से अक्षम, व्हीलचेयर पर होने के बावजूद चुनाव लड़ने का मोह नहीं त्यागते। इससे युवाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता है। भारतीय राजनीति अपनी बुजुर्गियत और वरिष्ठता की स्वामिभक्ति के साथ ठहर-सी गई है। 2014 में चुनी गई लोकसभा में सिर्फ 12 सांसद 30 साल से कम उम्र के हैं। इनमें दो सांसदों को छोड़कर बाकी राजनीतिक विरासत वाले परिवारों से हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों को अब गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले युवाओं को कुछ पदों पर आरक्षण/ प्रोत्साहन दिए जाने के साथ ही मुख्यधारा की राजनीति में युवा पत्रकार, वकील, डॉक्टर, उद्योगपति, चार्टर्ड एकाउंटेंट जैसे पेशेवरों को शामिल करने के मुद्दे पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए।
’कैलाश एम बिश्नोई, जोधपुर

दोस्त हैं पुस्तकें
कहा जाता है कि पुस्तकें इंसान की सबसे अच्छी दोस्त हैं। इसीलिए इंटरनेट के इस युग में भी पुस्तक प्रेमियों की कमी नहीं है। चाहे ई-बुक का दौर हो या सोशल मीडिया का, इनके बीच भी पुस्तकें मजबूती से खड़ी हैं। अगर हमें काल्पनिक दुनिया से बाहर निकल कर असल जिंदगी में आना है तो पुस्तकें इसमें सबसे ज्यादा मददगार हो सकती हैं। एक अच्छी बात है कि सरकार समय-समय पर पुस्तक मेले आयोजित करती रहती है जहां हमें जाना चाहिए और अपने बच्चों को भी वहां जाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे वे इंटरनेट से बाहर आकर वास्तविक दुनिया को देख सकेंगे।
’आशीष, रामलाल आनंद कॉलेज, दिल्ली

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