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चौपाल: अमेरिकी दखल गलत

केंद्र सरकार रूस से एस- 400 सुरक्षा प्रणाली तकनीक खरीदने जा रही है जो अमेरिकी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली से ज्यादा ताकतवर, सुरक्षित और टिकाऊ है।

Author October 13, 2018 4:35 AM
रूस के राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (Photo : PTI)

हाल में भारत और रूस के बीच हुए रक्षा समझौते को लेकर अमेरिका बौखलाया हुआ है। जब भी भारत के रिश्ते रूस, चीन और ईरान से बढ़ने लगते हैं तो अमेरिका बेचैन हो उठता है। ऐसे में व्यापारिक चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी है कि हम रक्षा क्षेत्र में बड़े कदम उठाएं जो भविष्य में भारत पर बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकें। आज जब हम अपनी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा लेकर सजग हैं तो अत्याधुनिक तकनीकों के बिना सुरक्षा की गारंटी देना सरकारों के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसलिए सरकार को वैश्विक दवाब के इतर जाकर ठोस फैसले लेने होंगे जो देश को एक मजबूत स्थिति में ला सकें।

दुनिया के किसी भी देश को इस तरह रोका जाना अमेरिका जैसे ताकतवर देशों के लिए आने वाले समय में मुश्किल भरा साबित हो सकता है। रूस भारत का बहुत पुराना साथी रहा है और मुश्किल समय में भारत का हमेशा साथ भी दिया है। केंद्र सरकार को इन परिस्थितियों को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज न करके अमेरिकी धमकियों का सख्त अंदाज में जवाब देना चाहिए। केंद्र सरकार रूस से एस- 400 सुरक्षा प्रणाली तकनीक खरीदने जा रही है जो अमेरिकी मिसाइल सुरक्षा प्रणाली से ज्यादा ताकतवर, सुरक्षित और टिकाऊ है। ऐसे में अमेरिका जैसे देशों की चिंता बढ़ना लाजिमी है। अमेरिका दुनिया के कितने देशों को इस तरह प्रतिबंधों के नाम पर आगे बढ़ने से रोकता रहेगा?
’रक्षित परमार, उदयपुर

स्वरोजगार ही उपाय
भारत की बढ़ती आबादी ने देश में बहुत-सी समस्याओं को जन्म दिया है। इन्हीं समस्याओं में एक बड़ी समस्या बेरोजगारी की भी है। आज देश में बेरोजगारों की लाइन जिस तरह लंबी होती जा रही है, उसको देखते हुए अब सरकारों स्वरोजगार के मौके बढ़ाने बारे में सोचना चाहिए। सभी बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दे पाना सरकार के वश में नहीं है, लेकिन सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देकर देश में रोजगार के अवसर तो बढ़ा सकती है। अगर स्वरोजगार की बात की जाए तो उसके लिए धन चाहिए और यह सुविधा सबके पास उपलब्ध नहीं है। ज्यादातर युवा तो इसे पाने की कोशिश में सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाते और अंत में हाथ मलते रह जाते हैें। अगर सरकारें कृषि, मत्स्य पालन और लगभग हर गांव में छोटी-बड़ी दूध की डेयरी खोलने के लिए लोगों को विशेष पैकेज जारी करें तो इससे सरकारों को भी काफी कमाई हो सकती है, खेतीबाड़ी भी अच्छी होगी, ज्यादा से ज्यादा मत्स्य पालन केंद्र खुल सकते हैं।
’राजेश कुमार चौहान, जलंधर

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