jansatta column Choupal Questions on reliability, about messages of social media and rumors - चौपाल: विश्वसनीयता पर प्रश्न - Jansatta
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चौपाल: विश्वसनीयता पर प्रश्न

निस्संदेह सोशल मीडिया आमजन के लिए अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन कर उभरा है लेकिन इसका दुरुपयोग भी हो रहा है। इसके मद्देनजर सोशल मीडिया के प्रमुख मंच व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और सरकार घृणा फैलाने अथवा सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुंचाने वाले संदेशों इस पर पैनी नजर रखें और उन्हें रोकें।

Author July 20, 2018 1:52 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

सोशल मीडिया विशेषकर व्हाट्सएप, फेसबुक और ट्विटर पर विद्वेष या घृणा फैलाने अथवा सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुंचाने वाले संदेश रोकने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की सरकार की मंशा अगर वाकई सच है, तो सराहनीय कही जाएगी। लेकिन इसमें संदेह नजर आता है क्योंकि अधिकांश पार्टियां ऐसे मुद्दों का सहारा लेकर अपनी राजनीति चमकाने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं। सर्वविदित है कि लगभग सभी राजनीतिक दल और संगठन अब बाकायदा अपने आईटी सेल स्थापित कर आमजन के बीच भ्रामक संदेश भेज कर उन्हें प्रभावित और दिग्भ्रमित करने का कुप्रयास करते हैं। युवा पीढ़ी इनसे प्रभावित भी हो जाती है। टीवी चैनलों पर इन दिनों ‘वायरल सच’ से जुड़े कार्यक्रम में इजाफा हुआ है ताकि लोगों को तथ्यों की सटीक जानकारी मिल सके। भ्रामक खबरों-संदेशों से हमारा समय भी व्यर्थ होता है और सोशल मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल भी खड़े होते हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर लोग गर्व से अमर्यादित भाषा परोस कर देश की संस्कृति को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। वैचारिक मतभेद को जबरन थोपना और स्वीकार न करने की स्थिति में मनभेद और कलह पाल लेना सामान्य बात हो गई है। राजनीतिक दलों के नेताओं को अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए अब ज्यादा परिश्रम नहीं करना पड़ता क्योंकि आईटी सेल के धुरंधरों ने उनका काम आसान कर दिया है।

इस सबके बीच सोशल मीडिया की उपयोगिता से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे समय में जब प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पेड न्यूज, फेक न्यूज के भंवर से खुद को बचा पाने में असहाय महसूस कर रहे हों और उनकी निष्पक्षता पर चर्चा करने की आवश्यकता पड़ रही हो, आमजन सोशल मीडिया को एक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। निस्संदेह सोशल मीडिया आमजन के लिए अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन कर उभरा है लेकिन इसका दुरुपयोग भी हो रहा है। इसके मद्देनजर सोशल मीडिया के प्रमुख मंच व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और सरकार घृणा फैलाने अथवा सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुंचाने वाले संदेशों इस पर पैनी नजर रखें और उन्हें रोकें। सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं को भी इसकी विश्वसनीयता बनाए रखने में दृढ़तापूर्वक सहयोग करना होगा तभी यह अपने उद्देश्यों में सार्थक हो पाएगा।
’मंजर आलम, रामपुर डेहरु, मधेपुरा, बिहार

नफरत की सियासत
स्वामी अग्निवेश पर हुआ हमला और पिछले दो-तीन महीने में बच्चा चोरी के आरोप में देश के अलग- अलग हिस्सों में बीस से अधिक लोगों की हत्याएं, या फिर कथित गोरक्षकों का उत्पात- यह हिंसक घटनाओं का ऐसा क्रम है जो हमारे लोकतंत्र के भीड़तंत्र का रूप लेने का सूचक है। यह तो साफ है कि इन घटनाओं को राजनीतिक शह प्राप्त है, लेकिन समाज के तौर पर हमारे लिए शर्मिंदगी की बात है कि हम कितनी आसानी से इन दलों के बहकावे में आ जाते हैं! राजनीतिक दल हमारे धार्मिक व जातिगत पूर्वाग्रहों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदों के लिए कर रहे हैं। समाज के तौर पर हमें सहिष्णु व जागरूक होने, अपनी विचार परिधि में विस्तार लाने और वैचारिक संकीर्णताओं को त्यागने की आवश्यकता है, तभी नफरत की इस राजनीति को परास्त कर पाएंगे।
’सूर्य प्रताप यादव, दंतेवाड़ा, छत्तीसगढ़

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