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चौपाल: स्कूल में अपराध

सवाल है कि क्या शिक्षण संस्थान जैसी जगहों पर भी अपराध और जुर्म के काले बादल छा जाएंगे? अगर ऐसा होगा तो वह दिन दूर नहीं जब माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगेंगे और ‘सब पढ़ें सब बढ़ें’ का सपना भारत के लिए सपना ही रह जाएगा।

Author July 19, 2018 2:40 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर किया गया है।

गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुए प्रद्युम्न हत्याकांड को साल भर भी नहीं बीता कि बिहार के शेफाली इंटरनेशनल स्कूल में छह वर्षीय मासूम की हत्या की घटना सामने आई है। घटना स्कूल के हॉस्टल की है जहां बच्चे अपने घर से दूर रह कर पढ़ने के लिए आते हैं। चिंता की बात तो यह है कि हत्या में जिनके नाम सामने आ रहे हैं वे कोई कुख्यात अपराधी नहीं, बल्कि स्कूल में ही पढ़ने वाले बच्चे हैं। उनकी उम्र तो अभी खेलने की है, विज्ञान से जुड़े नए-नए प्रयोगों को सीखने की है। इस उम्र में बच्चे हत्या जैसा संगीन जुर्म कैसे कर बैठते हैं?

यूनेस्को के आंकड़ों के मुताबिक 2017 में भारत के स्कूलों में अन्य देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा अपराध हुए हैं। इसके बावजूद स्कूल प्रशासन का ढीला रवैया यह दर्शा देता है कि उनके लिए शिक्षा महज एक व्यवसाय है। उन्हें बच्चों के जान की कोई परवाह नहीं है। सवाल है कि क्या शिक्षण संस्थान जैसी जगहों पर भी अपराध और जुर्म के काले बादल छा जाएंगे? अगर ऐसा होगा तो वह दिन दूर नहीं जब माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगेंगे और ‘सब पढ़ें सब बढ़ें’ का सपना भारत के लिए सपना ही रह जाएगा।
’अंकिता मोनालिशा, नोएडा

बेतुका बयान
कांग्रेस नेता शशि थरूर का कहना है कि अगर भाजपा दोबारा लोकसभा चुनाव जीतती है तो भारत ‘हिंदू पाकिस्तान’ बन जाएगा। थरूरजी, जब द्विराष्ट्र सिद्धांत के कारण देश का विभाजन हुआ, मुसलिम पाकिस्तान बना तब भी शेष भारत हिंदू राष्ट्र न बन कर धर्मनिरपेक्ष बना रहा। कट्टरता, सांप्रदायिकता दरअसल, आम हिंदू के डीएनए में नहीं हैं। यदि जरा भी होतीं तो गैरभारतीय/ गैरहिंदू धर्म यहां फल-फूल नहीं पाते, न विदेशी गुलामी का इतिहास रहा होता। जब वे अल्पसंख्यक हो जाएंगे तब की बात और है। बेतुके बयानबाज पहले भी थे, आज भी हैं। उनकी न पहले सुनी जाती थी, न आज। आप क्यों वोट की राजनीति के लिए देश के विभाजन की नींव रख रहे हैं!
’राधेश्याम ताम्रकर, इंदौर

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