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चौपाल : अधिकार से वंचित

...इसका परिणाम यह होगा कि निर्धन मेधावी छात्र, जिनमें मुख्यत: दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के होंगे, इन शिक्षण संस्थानों में शिक्षा पाने से वंचित हो जाएंगे और वे छात्र ही वहां प्रवेश पा सकेंगे जो भारी शुल्क चुकाने में समर्थ होंगे।

Author June 23, 2018 1:57 AM
मानव संसाधन मंत्रालय ने आदेश निकाला है कि देश के बासठ केंद्रीय विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों को स्वायत्तता प्रदान की जा रही है।

मानव संसाधन मंत्रालय ने आदेश निकाला है कि देश के बासठ केंद्रीय विश्वविद्यालय और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों को स्वायत्तता प्रदान की जा रही है। यानी अब वे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियंत्रण से मुक्त होंगे। अब वे स्वयं अपना पाठ्यक्रम बना सकेंगे और शिक्षण शुल्क व अन्य शुल्क निर्धारित कर सकेंगे। दूसरे शब्दों में, अब इन शिक्षण संस्थानों को यूजीसी से कोई अनुदान नहीं मिलेगा। इस आदेश का परिणाम यह होगा कि अपने लिए संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी इन उच्च शिक्षा संस्थानों पर आ जाएगी। इसके लिए उन्हें शिक्षण शुल्क और अन्य शुल्कों में अनाप-शनाप वृद्धि करना पड़ेगी।

इसका परिणाम यह होगा कि निर्धन मेधावी छात्र, जिनमें मुख्यत: दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्गों के होंगे, इन शिक्षण संस्थानों में शिक्षा पाने से वंचित हो जाएंगे और वे छात्र ही वहां प्रवेश पा सकेंगे जो भारी शुल्क चुकाने में समर्थ होंगे। इस प्रकार केंद्र सरकार द्वारा गरीब और वंचित वर्गों के मेधावी छात्रों को उच्च एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार से वंचित किया जा रहा है। लिहाजा, देश के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों और प्राध्यापकों को इस कानून का विरोध करना चाहिए।
’प्रवीण मल्होत्रा, इंदौर

समय रहते
अगले माह श्रावण मास में कांवड़ यात्रा प्रारंभ होने वाली है। कांवड़ का यह समय हरिद्वार शहर को वर्ष भर में सबसे ज्यादा व्यस्त रखता है। प्रतिवर्ष देखा जाता है कि कांवड़ यात्रा के दौरान बेहिसाब गंदगी यहां-वहां बिखर जाती है और प्रशासन अक्सर बारिश का इंतजार करता रहता है। सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति शौचालय को लेकर होती है। प्रशासन समय पर शौचालयों की उचित व्यवस्था नहीं कर पाता और इससे गंगा की पवित्रता भी अक्षुण्ण नहीं रह पाती है। ऐसे में प्रशासन को पहले से ही वे तमाम इंतजाम करने चाहिए जिनसे गंगा की पवित्रता और कांवड़ियों की सुविधा के साथ-साथ जनता को परेशानी से भी निजात मिल सके।

कानपुर, बनारस, पटना आदि शहरों में जिस तरह गंगा की सफाई का काम तेजी से हो रहा है उससे यह उम्मीद बन गई है कि मार्च 2019 से पूर्व सत्तर प्रतिशत गंगा की सफाई हो जाएगी। उस स्थिति में यदि गंगा हरिद्वार में ही साफ नहीं होगी तो फिर बड़े औद्योगिक शहरों में कितनी भी सफाई की जाए, कुछ न कुछ कमी तो बनी ही रहेगी। लिहाजा, प्रशासन के लिए यह प्राथमिकता का विषय होना चाहिए कि वह बारिश का इंतजार किए बगैर गंगा की साफ सफाई पर ध्यान दे।
’द्विजेंद्र, हरिपुर कलां, देहरादून

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