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चौपाल: कथनी बनाम करनी

आज यदि भाजपा अपने वादों पर और कांग्रेस अपनी पुरानी बातों पर अडिग रहतीं और दिल्ली के लोगों के हित में कार्य करतीं तो शायद इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने में भी सहूलियत होती। यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता तो पूर्व में इन पार्टियों ने यह आश्वासन कैसे दिया था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा हम दिलाएंगे?

Author July 7, 2018 3:42 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच तनातनी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को राजनीतिक लाभ-हानि के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए जैसा कि सभी राजनीतिक दल अपने-अपने स्वार्थ के लिहाज से इस निर्णय का मूल्यांकन कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों आम आदमी पार्टी को कोस रही हैं जबकि दिल्ली की बदहाली में इनका कम योगदान नहीं है। आज यदि भाजपा अपने वादों पर और कांग्रेस अपनी पुरानी बातों पर अडिग रहतीं और दिल्ली के लोगों के हित में कार्य करतीं तो शायद इसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने में भी सहूलियत होती।
यदि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता तो पूर्व में इन पार्टियों ने यह आश्वासन कैसे दिया था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा हम दिलाएंगे? केंद्र में जब यूपीए की सरकार थी तब भारतीय जनता पार्टी ने कहा था कि हम सत्ता में आएंगे तो दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएंगे।

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आज जब केंद्र में भाजपा की सरकार है तो उसके नेताओं को लग रहा है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा सकता।आने वाले समय में दिल्ली की जनता को गंभीरता से सोचना चाहिए उसके हित में कौन राजनीतिक दल ज्यादा अच्छा करने की सोचता है या करता है। बाकी तो भारतीय राजनीति में ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’ के सिद्धांत को मानने वाले नेता ही ज्यादा हैं। उनकी कथनी-करनी में आकाश-पाताल का अंतर है।
’सुशील कुमार शर्मा, उत्तम नगर, नई दिल्ली

सुविधा का तकाजा

बहुत-से रेल यात्री बस, रेलगाड़ी, होटल आदि के समय में विभिन्नता के कारण ट्रेन छूटने से कई घंटे पहले स्टेशन पहुंच जाते हैं। ऐसे यात्रियों के लिए वेटिंग रूम (प्रतीक्षालय) होते हैं जहां यात्री सुरक्षा से बैठ सकता है, शौचालय जा सकता है। कई बड़े स्टेशनों पर बेडरूम भी होते हैं जहां यात्री शुल्क देकर कुछ घंटे लेट सकता है। इसके विपरीत हवाई यात्रा में विभिन्न कारणों से काफी पहले आने की बाध्यता के बावजूद वेटिंग रूम की कोई सुविधा नहीं मिलती। बहुत-सी जगह फ्लाइट सुबह तीन या चार बजे की होती हैं व भोर से पहले लोकल बस की सुविधा भी नहीं होती।

ऐसे में अगर कोई यात्री रात में एयरपोर्ट आकर प्रतीक्षा करना चाहे तो उसे प्रतीक्षालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है। हवाई अड्डे पर पहले आने वाले यात्रियों के लिए वेटिंग रूम होना चाहिए जहां यात्री विमान के उड़ान भरने से पहले तक आराम कर सकें। कुछ 100 रुपए लेने वाला रेलवे तो यात्रियों को वेटिंग रूम की सुविधा देता है पर हजारों रुपए लेने वाली एयरलाइन यात्रियों को लेटने या आराम करने की सुविधा नहीं देती।
’जीवन मित्तल, मोती नगर, दिल्ली

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