ताज़ा खबर
 

चौपाल : बदलाव के शिकार

लेनिन दुनिया भर में मजदूरों और दबे-कुचले वर्ग के मसीहा के तौर पर स्थापित हैं। लेनिन की नीतियों की आलोचना की जा सकती है लेकिन गरीबों के लिए किए गए उनके अविस्मरणीय कार्यों को कोई नकार नहीं सकता।

Author March 8, 2018 4:17 AM
त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ति जेसीबी से ढहाने का आरोप बीजेपी कार्यकर्ताओं पर लगा है।

बदलाव के शिकार
पूर्वोत्तर में भारतीय जनता पार्टी की अभूतपूर्व जीत ने उसका राष्ट्रीय पार्टी बनने का सपना लगभग पूरा कर दिया है। त्रिपुरा में तो पच्चीस साल से काबिज वामपंथी सरकार को हटा कर केसरिया ब्रिगेड अति उत्साही हो गई है। इसकी बानगी त्रिपुरा के बेलोनिया शहर में देखने को मिली जहां जीत के जश्न में डूबे भाजपा कार्यकर्ताओं ने विश्वविख्यात वामपंथी नेता ब्लादमीर लेनिन की प्रतिमा को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। किसी भी विचारधारा से मतभेद रखना स्वाभाविक हो सकता है लेकिन किसी विचारधारा को दबाना या कुचलना निहायत अलोकतांत्रिक और असहिष्णुता का प्रदर्शन है। लेनिन दुनिया भर में मजदूरों और दबे-कुचले वर्ग के मसीहा के तौर पर स्थापित हैं। लेनिन की नीतियों की आलोचना की जा सकती है लेकिन गरीबों के लिए किए गए उनके अविस्मरणीय कार्यों को कोई नकार नहीं सकता। पूंजीवादी मुल्क भी उन पर सवालिया निशान लगाने से गुरेज करते हैं। ऐसे में हिंदुस्तान जैसे देश में यह घटना लोकतंत्र और वैचारिक आजादी पर हमला है।
’रोहिताश चौधरी, जिम्सी, नोएडा

लोकपाल पर कांग्रेस
लोकपाल और लोकायुक्त कानून के अनुसार लोकपाल चयन समिति में अन्य लोगों के अलावा लोकसभा में विपक्ष का नेता शामिल होता है। अब क्योंकि सदन में कोई नेता विपक्ष नहीं है, इसलिए उक्त अधिनियम में संशोधन करके नेता विपक्ष अथवा विपक्ष के सबसे बड़े दल का नेता- ये शब्द लाए जाने थे। सरकार की ओर से यह संशोधन लोकसभा में तो पारित करा लिया गया, लेकिन कांग्रेस ने राज्यसभा की कार्यवाही में लगातार विघ्न डाल कर रोड़ा अटकाए रखा। अब जब सरकार ने चयन समिति के लोकसभा में कांग्रेस दल-नेता मल्लिकार्जुन खडगे को आमंत्रित सदस्य के रूप में न्योता दिया तो वे लाल-पीले हो गए- जाऊंगा तो वोट देने की पॉवर के साथ, वरना समिति का बहिष्कार! वोट की पॉवर चाहिए थी तो संशोधन को पारित क्यों नहीं होने दिया खडगे साहब?
’लक्ष्मण वर्मा, अबू लेन, मेरठ कैंट

ये दोषी
अमेरिका और रूस हालांकि हमारे मित्र राष्ट्र हैं लेकिन वैश्विक तौर पर ये दोनों किसी भी देश में गृह युद्ध फैलाने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। मानवता की ये बिल्कुल चिंता नहीं करते हैं। ये दोनों पूंजी के बूते दुनिया को अपने दम पर कठपुतलियों की तरह नचाना चाहते हैं। क्या हमें यह स्वीकार्य होना चाहिए? दुनिया के कई देश इनकी कूटनीति की चपेट में आ चुके हैं। यहां तक कि भारत-पाकिस्तान भी इनकी राजनीति के ही शिकार होते रहे हैं। किसी भी एक देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने में ये दोनों ही बड़े चालाक और धूर्त रहे हैं। दोनों को वैश्विक शांति में अहम योगदान देने के लिए कटिबद्ध होना चाहिए । इन्हें दुनिया में अहिंसा का वातावरण पैदा करने के प्रयास करने होंगे।
’रक्षित परमार, उदयपुर, राजस्थान

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App