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चौपाल: हरित कवच

भारत सरकार ने 2015 में पेरिस समझौते के तहत 2.5 बिलियन टन कार्बनडाई ऑक्साइड सोखने की क्षमता के वायदे को पूरा करने के लिए 2030 तक देश में 120 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

Author April 16, 2018 03:27 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर किया गया है। MEANSCONNECT.ORG

भारत उन कुछ देशों में से एक है जो जैव विविधता की दृष्टि से धनी हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण 2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल भाग का 7,08,273 वर्ग किलोमीटर वनों से आच्छादित है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में वन और वृक्षावरण की स्थिति में 2015 की तुलना में 8021 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई है। इसमें 6,778 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि वन क्षेत्रों में हुई है, जबकि वृक्षावरण क्षेत्र में 1243 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जैव विविधता में समृद्ध होने के बावजूद अपने वन आवरण के रूप में देश की तस्वीर काफी चिंताजनक है। भारतीय वन सर्वेक्षण 2017 की रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.54 प्रतिशत भाग वन क्षेत्र है, जबकि राष्ट्रीय वन नीति के अनुसार भू-भाग का तैंतीस फीसद हिस्सा वनों से आच्छादित होना चाहिए।

पर्यावरण के संबंध में वनों और पेड़ों का बहुत महत्त्व है। एक पेड़ से इतनी शीतल छाया मिलती है जितनी पांच एयर कंडीशनर बीस घंटे लगातार चल कर देते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों से मालूम हुआ है कि महज 93 घन मीटर में लगा वन आठ डेसीबल ध्वनि प्रदूषण को दूर करता है और एक हेक्टेयर में लगा वन बीस कारों द्वारा पैदा कार्बन डाईआक्साइड और धुएं को अवशोषित करता है। वनों का अधिक होना आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। वनों का उपयोग औषधियां, शहद, चारा, फल, गोंद, कागज, बीड़ी, लाख, रेशम और कागज तैयार करने में बहुतायत में किया जाता है। पशु प्रजातियों के लिए पारिस्थितिक संतुलन, कृषि, पर्यावरण, आवास के दृष्टिकोण से और मिट्टी के क्षरण की प्राकृतिक रोकथाम के रूप में वन बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। वन बड़ी संख्या में जनजातियों का घर हैं। हमारे देश में 1.73 लाख गांव तो ऐसे हैं जो वनों के अंदर या उनके आसपास रहते हैं और इन गांवों में रहने वाली आबादी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से वनों पर निर्भर है। आदिवासी जीवन की कल्पना तो बिना वनों के की ही नहीं जा सकती।

वृक्षारोपण द्वारा ग्लोबल वार्मिंग कम करने के उद्देश्य से अध्ययन करने पर मालूम हुआ है कि एक सामान्य लंबाई का पौधा एक वर्ष में चार सदस्यों वाले एक परिवार के लिए पर्याप्त आक्सीजन उपलब्ध कराता है। यही नहीं, घरों और इमारतों के चारों ओर उचित स्थान पर वृक्षारोपण करने से वातानुकूलन लागत को पचास फीसद तक कम किया जा सकता है। ध्यान देने वाली बात है कि भारत सरकार ने 2015 में पेरिस समझौते के तहत 2.5 बिलियन टन कार्बनडाई ऑक्साइड सोखने की क्षमता के वायदे को पूरा करने के लिए 2030 तक देश में 120 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। यदि औसतन चालीस प्रतिशत पौधे भी विकसित होते हैं तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
’कैलाश एम बिश्नोई, मुखर्जीनगर, दिल्ली

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