ताज़ा खबर
 

चौपाल: देशहित में

चुनाव आयोग की तरह रिजर्व बैंक भी पूरी तरह सरकार के नियंत्रण से बिल्कुल बाहर होने चाहिए। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक एक्ट का सेक्शन सात सरकार को एक खास अधिकार देता है।

Author November 3, 2018 6:37 AM
आरबीआई से नाराज है मोदी सरकार। (express/file photo)

जब से केंद्र में भाजपा सत्ता में आई है, तब से इस सरकार के ऐसे-ऐसे काम सुर्खियों में हैं जो देश की आजादी के बाद से पहली बार हो रहे लगते हैं। नोटबंदी, जीएसटी के फैसले के बाद अब रिजर्व बैंक से कुछ मुद्दों को लेकर टकराव भी आजाद देश में शायद पहली बार ही हुआ। चुनाव आयोग की तरह रिजर्व बैंक भी पूरी तरह सरकार के नियंत्रण से बिल्कुल बाहर होने चाहिए। लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक एक्ट का सेक्शन सात सरकार को एक खास अधिकार देता है। इस सेक्शन के तहत सरकार गवर्नर को निर्देश दे सकती है और उसके साथ देश की आर्थिक व्यवस्था पर बातचीत भी कर सकती है।

अगर यह टकराव बेलगाम होता है तो इतना तय है कि आने वाले दिनों में देश में एक बड़ा संकट खड़ा हो जाए। इसलिए जरूरी है कि सरकार और रिजर्व बैंक, दोनों ही अपनी तकरार को जल्दी से जल्दी विराम दें और देश की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने और रुपए की गिरती कीमतों को लुढ़कने से बचाने के लिए एकजुट होकर प्रयास करें। संवैधानिक संस्थाओं का कमजोर होना देशहित में कतई नहीं होगा।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

सबके लिए
बाबरी मस्जिद और राम मंदिर को लेकर पिछले कई सालों से बात चलती आ रही है। इसका समाधान अभी तक नहीं निकल सका है और जो हालात हैं, उससे यही लगता है कि यह मामला अभी लटका रहेगा। दरअसल, यह मुकदमा इतना सरल नहीं है। हम कह सकते हैं कि यह दो समुदाय की मानसिकता की लड़ाई है! कोई भी धर्म या मजहब हमें नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। शायर सुल्तानपुरी ने काफी पहले असली हिंदुस्तान खोजने की कोशिश कि थी- ‘हिंदू और मुसलमान की जान, कहां है मेरा हिंदुस्तान उसे मैं ढूंढ़ रहा हूं।’ यही हिंदुस्तान आज सभी तलाश कर रहे हैं।

मंदिर या मस्जिद बनाने से क्या होगा! आज भी उत्तर प्रदेश में बढ़िया स्कूल या अस्पताल नहीं हैं। लोगों को अब परस्पर अपने स्वार्थ को छोड़ कर सभी लोगों के हित में सोचना चाहिए। सबसे बेहतर होगा कि वहां पर सार्वजनिक संस्थान जैसे स्कूल, अस्पताल आदि खोल दिया जाए। इससे सभी समुदायों और सभी वर्गों के लोग उसका फायदा उठा पाएंगे। इस मुदकमे का समाधान कोर्ट में बैठे न्यायाधीश जो भी निकालें, लेकिन कोई उपयोगी फैसला जनता ही करेगी कि वहां सबके हित के लिए सार्वजनिक संस्थान जरूरी है, मंदिर या मस्जिद नहीं!
’रवि रंजन कुमार, पंजाब केंद्रीय विवि

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App