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चौपाल: भविष्य का र्इंधन

इस र्इंधन की खासियत है कि इससे कार्बन उत्सर्जन घटता है और र्इंधन की दक्षता भी बढ़ जाती है। साथ ही परंपरागत र्इंधन की अपेक्षा इसकी लागत बहुत कम बैठती है। इसके प्रयोग से ग्रीन हाउस प्रभाव व वायु प्रदूषण पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है।

Author August 31, 2018 2:18 AM
जैव र्इंधन का प्रयोग देश और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद फायदेमंद है।

बीते सोमवार को देश के एक विमान ने देहरादून से दिल्ली तक अभूतपूर्व उड़ान भरी। अभूतपूर्व इसलिए कि देश के किसी विमान में पहली बार जैव र्इंधन का सफल प्रयोग हुआ। इसके साथ ही भारत अमेरिका, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे उन पच्चीस देशों में शामिल हो गया जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। इस विमान में परंपरागत र्इंधन के साथ पच्चीस फीसद जैव जेट र्इंधन का इस्तेमाल किया गया। यह जैव र्इंधन जटरोफा नामक वनस्पति से बनाया गया है। इसके विकास का श्रेय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद व भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के वैज्ञानिकों की नौ साल की कड़ी मेहनत को जाता है।

इस र्इंधन की खासियत है कि इससे कार्बन उत्सर्जन घटता है और र्इंधन की दक्षता भी बढ़ जाती है। साथ ही परंपरागत र्इंधन की अपेक्षा इसकी लागत बहुत कम बैठती है। इसके प्रयोग से ग्रीन हाउस प्रभाव व वायु प्रदूषण पर काफी हद तक लगाम लगाई जा सकती है। देश के लिए सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे पेट्रोलियम का आयात कम करना होगा नतीजतन, विदेशी मुद्रा की बचत होगी। विमान सेवा कंपनी स्पाइसजेट के मुताबिक विमानों में जैव जेट र्इंधन के प्रयोग से परंपरागत र्इंधन पर निर्भरता में पचास फीसद की कमी लाई जा सकती है। जैव र्इंधन का प्रयोग देश और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद फायदेमंद है। उम्मीद है कि जल्द ही जैव र्इंधन का प्रयोग विमानों के व्यावसायिक परिचालन में किया जाने लगेगा।
’अंकित रजक, बिल्हारी-दतिया, मध्यप्रदेश

मदद की जरूरत
पिछले सौ सालों में केरल शायद ही कभी ऐसी भयावह स्थिति से गुजरा है। तकरीबन 350 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और तीन लाख लोग बेघर हुए हैं। इस कठिन घड़ी में जब सबको केरल के लोगों के साथ खड़ा होना चाहिए तब सरकार द्वारा दी गई सहायता राशि पर राजनीति होने लगी है। देश के लोगों को हर मुद्दे पर तुलना और राजनीति करने की एक गंभीर बीमारी लग गई है। कुछ लोग केरल के लिए दुआ करने बजाय सरकार ने किस योजना में कितना दिया है उसे गिनने में लगे हुए हैं। सोशल मीडिया पर प्रचार किया गया कि केंद्र सरकार द्वारा मात्र 100 करोड़ की धनराशि प्रदान की गई है।

सच्चाई यह है कि सबसे पहले गृहमंत्री ने 100 करोड़ रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की और बाद में प्रधानमंत्री ने 500 करोड़ रुपए देने की घोषणा कर दी। सरकार की इस बात के लिए आलोचना करना वाजिब है कि यह रकम नाकाफी है। लेकिन इस बात पर बखेड़ा खड़ा करना बिल्कुल नाजायज है कि शिवाजी की मूर्ति या कुंभ मेले और प्रचार के लिए इतनी धनराशि दी गई और केरल को मात्र इतनी ही! केरल को अभी पूरे देश के सहयोग की जरूरत है न कि राजनीतिक बखेड़े। केरल में लगभग बीस हजार करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ है। राज्य सरकार ने इस बाबत केंद्र से मांग कर दी है कि उसे और भी आर्थिक सहायता की जरूरत है। अगर केंद्र के पास पैसे भी नहीं हैं तो भी उसे कहीं से बंदोबस्त करके केरल सरकार को राहत राशि देनी चाहिए।
’सचिन धर दुबे, भोपाल

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