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चौपाल: बदलती सूरत

आज राजधानी दिल्ली के स्कूलों की जो स्थिति बदल रही है, पटरी पर आ रही है, वैसे ही अन्य राज्यों को भी कदम उठाना होगा। लेकिन अभी भी काफी काम करना बाकी है। उदाहरण के लिए लोगों की मानसिकता को बदलना बहुत जरूरी है।

Author August 25, 2018 2:00 AM
सरकारी स्कूल की फाइल फोटो

दिल्ली में कई समस्याओं के बावजूद आज यह स्वीकार करना होगा कि यहां के सरकारी स्कूलों की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। चाहे बात बुनियादी ढांचे की हो या पढ़ाई के मामले में, सरकारी स्कूल आज प्राइवेट स्कूलों से भी बेहतर नतीजे देने लगे हैं। अब शिक्षा व्यवस्था पर पूरा जोर दिया जाने लगा है। कमजोर बच्चों के लिए विशेष शिक्षक हैं जो ‘जीरो पीरियड’ में उन्हें ज्यादा बेहतर शिक्षा दे रहे हैं। विशेष कक्षाओं के साथ खेल को भी अनिवार्य विषय बना दिया गया है। यह बेवजह नहीं है कि आज हमारे सरकारी स्कूलों के बच्चे प्राइवेट स्कूल के बच्चों के साथ बराबर का मुकाबला कर रहे हैं। सही मायनों में देखा जाए तो शिक्षा की समग्र स्थिति पहले से काफी अच्छी हो गई है। स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई का वातावरण पैदा हुआ है। समय-समय पर अभिभावक और शिक्षकों की मीटिंग भी होने लगी है। एक अच्छी खबर यह लगी कि स्कूलों में ‘स्मार्ट क्लासेज’ शुरू हो गई हैं। लेकिन इसे नियमित रूप से बरकरार रखना सरकार का काम है।

आज राजधानी दिल्ली के स्कूलों की जो स्थिति बदल रही है, पटरी पर आ रही है, वैसे ही अन्य राज्यों को भी कदम उठाना होगा। लेकिन अभी भी काफी काम करना बाकी है। उदाहरण के लिए लोगों की मानसिकता को बदलना बहुत जरूरी है। लोग सरकारी नौकरी तो चाहते हैं, लेकिन अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना नहीं चाहते। गुणवत्ता के स्तर पर सरकारी स्कूलों के बदलते स्वरूप के साथ हमें अपनी सोच बदलनी होगी। सरकार को भी अपना कर्तव्य समझना होगा और शिक्षा व्यवस्था का नया रूप तैयार करना होगा। इससे देश के विकास का सपना आगे बढ़ेगा और साकार होगा।
’आशीष, रामलाल आनंद कॉलेज, दिल्ली विवि

वन से जीवन
भारत में आज वनों की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है। यह एक चिंता का विषय है, क्योंकि वन ही जीवन है, यह हम शायद भूल गए हैं। इसका मुख्य कारण आधुनिकता की दौड़ है जिसकी रफ्तार और तेज हो रही है। इसमें पेड़ों को काट कर वन क्षेत्र कम किए जा रहे हैं और कारखानों या फिर घरों की संख्या बड़ा दी गई है। इससे वायु दूषित होती जा रही है। आज हालत यह है कि ओजोन परत में छेद हो गया है, जिससे हानिकारक पराबैंगनी किरणें कैंसर जैसी बीमारियों को फैला रही हैं। इतना ही नहीं, आज साधन सीमित हो गए हैं, क्योंकि हम पर्यावरण के प्रति जागरूक नहीं हैं।

भारत सरकार द्वारा हरित मिशन के तहत बंजर भूमि, भवनों, सड़कों, घरों आदि में वन लगा कर भारत को सुंदर बनाया जाना है। लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है, क्योंकि इंसान आधुनिकता की चकाचौंध में इतना लीन हो गया है कि वह पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने लगा है। हमें वनों के प्रति प्रेम की भावना उत्पन्न करनी होगी। पेड़ हमारे अपने हैं, जो हमसे दूर होते जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण से संबंधित शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना होगा।
’शादमा मुस्कान, दिल्ली

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