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श्रीनगर: बढ़ती जा रही हैं पत्थरबाजों की नापाक हरकतें, पर्यटक को उतारा मौत के घाट

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और केंद्र सरकार इन पत्थरबाजों के नापाक इरादों और हरकतों पर नकेल कसने के लिए सख्त कदम क्यों नहीं उठाती हैं? प्रधानमंत्री ने 2014 के चुनाव प्रचार में कश्मीर में अमल बहाली और वहां की समस्याओं का हल निकालने के लिए बहुत बड़ी-बड़ी बातें कही थीं।

Author May 10, 2018 04:51 am
कश्मीर में होने वाली हिंसा में स्थानीय युवकों की संख्या बढ़ती जा रही है. (फाइल फोटो)

चौपाल: नापाक इरादे

श्रीनगर में पत्थरबाजों ने अपने नापाक इरादों को अंजाम देते हुए कश्मीर घूमने आए एक पर्यटक की जान ले ली। उनकी नापाक हरकतें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। सवाल है कि जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और केंद्र सरकार इन पत्थरबाजों के नापाक इरादों और हरकतों पर नकेल कसने के लिए सख्त कदम क्यों नहीं उठाती हैं? प्रधानमंत्री ने 2014 के चुनाव प्रचार में कश्मीर में अमल बहाली और वहां की समस्याओं का हल निकालने के लिए बहुत बड़ी-बड़ी बातें कही थीं। राजा हरिसिंह के समय भी पाकिस्तान ने कश्मीर में माहौल खराब किया था। अपने जुल्मो सितम से उसने कश्मीरियों का जीना दुश्वार कर दिया था। उस समय भी राजा हरिसिंह ने कश्मीरियों का दुख-दर्द दूर करने के लिए भारत से मदद मांगी थी। भारत ने तब कश्मीरियों को पाकिस्तान के जुल्म सितम से बचाया था। अब फिर समय आ चुका है कि भारत कश्मीरियों की जिंदगी खुशहाल बनाने और कश्मीर को जन्नत बनाने के लिए सख्त फैसले करे। कश्मीर समस्या का हल तब तक बातचीत से नहीं निकलने वाला जब तक पाक के कट्टरपंथी भारत के प्रति अपनी संकीर्ण सोच नहीं बदलते। पाकिस्तान के सत्ताधारी भी तो उन कट्टरपंथियों के हाथों की ही कठपुतली हैं। अगर धरती के स्वर्ग कश्मीर का माहौल शांत हो जाए तो वहां बारहों महीने देश-विदेश के पर्यटकों का तांता लगा रहे और रोजगार की बाहर आ जाए।
’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

क्या औचित्य
सरकार ने ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना के जरिए लालकिला समेत देश की दस ऐतिहासिक धरोहरों को निजी कंपनियों को सौंपने का निर्णय किया है। इन इमारतों से इतिहास की कई अहम घटनाएं जुड़ी हैं लिहाजा, इन्हें निजी हाथों में देने से पहले जनता की राय जरूर लेनी चाहिए। सरकार ने पच्चीस करोड़ का अनुबंध अगले पांच साल के लिए किया है। क्या वह पांच करोड़ रुपए प्रतिवर्ष इन इमारतों के रख रखाव पर ईमानदारी से खर्च नहीं कर सकती है? सरकार ऐसी धरोहरों को निजी कंपनियों के हाथों में सौंप देगी तो संस्कृति मंत्रालय और भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण जैसी संस्थाओं का औचित्य क्या रह जाएगा?
’महेश कुमार, सिद्धमुख, राजस्थान

राहुल उवाच
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि वे प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार हैं (जनता इसके लिए तैयार है या नहीं, इसका तो अभी पता नहीं)। यूपीए-प्रथम के समय जब वे महज यूथ कांग्रेस के नेता थे तो उन्होंने यह कह कर देश को चौंकाया था कि उनके पिता की हत्या के बाद उन्हें प्रधानमंत्री पद का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। पिता राजीव गांधी की हत्या के समय यानी 1991 में राहुल केवल 21 वर्ष के थे, जबकि लोकसभा सांसद बनने के लिए न्यूनतम आयु 25 वर्ष है। और यह तो राहुलजी भी जानते रहे होंगे कि बिना संसद सदस्य बने प्रधानमंत्री नहीं बना जा सकता।

आज वे भूल रहे हैं कि फिलहाल लोकसभा का नहीं, कर्नाटक विधानसभा का चुनाव है, जिसमें उनकी व्यक्तिगत स्थिति इतनी शोचनीय है कि जनसभाओं में उन्हें सिद्धारमैया, यानी उनकी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी से पहले बुलवाया जाता है। कारण यह बताया जाता है कि लोग सिद्धारमैया के भाषण के बाद राहुल को सुनने के लिए रुकना पसंद नहीं करते! राहुल की उपरोक्त असामयिक घोषणा के कारण कर्नाटक में कांग्रेस व सिद्धारमैया की चुनावी संभावनाओं पर कोई सकारात्मक प्रभाव न पड़ कर प्रतिकूल असर ही पड़ सकता है।
’आस्था गर्ग, बागपत रोड, मेरठ

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