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चौपाल: स्वच्छता की खातिर

केंद्र सरकार की कोशिश है कि 2019 तक देश के सभी राज्य खुले में शौच से मुक्त हो जाएं। यह लक्ष्य सरकार, सरकारी व्यवस्था और जनभागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता है। महानगरों की बात छोड़ दें तो आज भी स्वच्छता को लेकर न समाज के नागरिक जागरूक नजर आ रहे हैं न सरकारी व्यवस्था दुरुस्त है।

Author September 22, 2018 4:35 AM
पीएम नरेंद्र मोदी। (express photo)

पिछले चार सालों में केंद्र सरकार ने जिस प्रकार स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन का रूप देने की कोशिश की है वह स्वागतयोग्य है। लेकिन कड़वी सच्चाई है कि विश्व में हमारे देश की छवि स्वच्छता के मामले में काफी खराब है क्योंकि विदेशों से आए पर्यटक भारत की गंदगी देखकर उसकी तस्वीर पूरी दुनिया को दिखाते आए हैं। इसी तस्वीर को बदलने की कोशिश सरकार द्वारा की जा रही है। हमारा देश विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बनने के कगार पर खड़ा है लेकिन स्वच्छता ही एक ऐसा क्षेत्र है जहां हम कई मुल्कों से पीछे हैं।

केंद्र सरकार की कोशिश है कि 2019 तक देश के सभी राज्य खुले में शौच से मुक्त हो जाएं। यह लक्ष्य सरकार, सरकारी व्यवस्था और जनभागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता है। महानगरों की बात छोड़ दें तो आज भी स्वच्छता को लेकर न समाज के नागरिक जागरूक नजर आ रहे हैं न सरकारी व्यवस्था दुरुस्त है। अकेले सरकार के चाह लेने भर से स्वच्छता अभियान को सफल नहीं बनाया जा सकता है। इसके लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है।

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार खुले में शौच से मुक्त होने के बाद भारत में हर साल तीन लाख लोगों की जान बच सकेगी। अब तक ग्यारह राज्य खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। स्वच्छ भारत अभियान के लिए सरकार ज्यादा से ज्यादा धन दे सकती है, साधन मुहैया करा सकती है लेकिन इसे सफल बनाने के लिए जनता की भागीदारी आवश्यक है।
’अमनदीप सिंह, नई दिल्ली

चुनावी रंग
इन दिनों भारत में राजनीति सिद्धांतों से हट कर एक मोटे मुनाफे वाला व्यापार बन गई है। यहां जिस सामान की बिक्री ज्यादा होती है दुकान में वही सामान रख लिया जाता है और उसकी सजावट व रंग आदि भी बदल दिए जाते हैं। जो नेता रोजा इफ्तार पार्टी देते थे और भगवा या हिंदू आतंकवाद की बात करते थे वे कुछ राज्यों में विधानसभा और आगामी लोकसभा चुनाव को करीब आते देख अब मंदिरों में घंटा बजा कर, माता की आरती और तीर्थ यात्रा का मीडिया में भरपूर प्रचार कर रहे हैं। इसका श्रेय प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हिंदूवादी राजनीतिक पार्टी और संगठनों को जाता है।

ऐसे लोगों की सूची भी दिन प्रतिदिन लंबी होती जा रही हैं जो खुद को जनेऊधारी हिंदू दिखाना चाहते हैं। इनमें कांग्रेस के बड़े नेताओं के अलावा ज्यादातर तथाकथित सेकुलर नेता हैं जो अपनी मूल विचारधारा से हट कर खुद को हिंदू साबित करने में लगे हैं। सत्ता के लालच में अपनी विचारधारा से दूर जाना एक प्रकार से जनता के साथ धोखे के समान ही है। भारत की जनता सीधी और सरल तो है लेकिन नादान नहीं है। वह इस फर्जी दिखावे को बखूबी समझती है और समय आने पर जवाब अवश्य देती है।
’सुनील कुमार सिंह, मेरठ, उत्तर प्रदेश

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