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चौपाल: इंसानियत का तकाजा

सड़क हादसों में घायल बहुत सारे लोग सही समय पर उचित उपचार न मिलने कारण दम तोड़ देते हैं। कुछ लोग दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद इसलिए भी नहीं करते हैं कि उन्हें पुलिस के झमेले का सामना न करना पड़े।

Author August 10, 2018 2:30 AM
सांकेतिक तस्वीर

हाल ही में जालंधर में ट्रक की चपेट में आने से एक मोटरसाइकिल सवार की मौत हो गई। घायल अवस्था में युवक करीब पैंतालीस मिनट तक बारिश में तड़पता रहा, लेकिन किसी भी राहगीर ने उसे फौरन अस्पताल तक पहुंचाने की जरूरत नहीं समझी। कुछ लोग वहां खड़े होकर तमाशा देखते रहे। देश में न जाने ही कितनी ही ऐसी सड़क दुर्घटनाएं होती होंगी, जहां लोग तमाशा बन कर देखते रहते हैं, लेकिन घायलों को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश नहीं करते। जबकि अगर कहीं कोई दुर्घटना होती है तो मौके पर मौजूद लोगों को इंसानियत और नैतिकता के तकाजे पर यह अपना फर्ज समझना चाहिए कि उसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें और दुर्घटना के शिकार का तमाशा बना कर न देखें। बल्कि पीड़ित को तुरंत अस्पताल तक पहुंचाने का इंतजाम करना चाहिए, एंबुलेंस को भी सूचित करना चाहिए। इन बातों पर अमल करते हुए अगर किसी की जान बच जाए तो यह एक बड़ा इंसानियत का काम होगा।

सड़क हादसों में घायल बहुत सारे लोग सही समय पर उचित उपचार न मिलने कारण दम तोड़ देते हैं। कुछ लोग दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद इसलिए भी नहीं करते हैं कि उन्हें पुलिस के झमेले का सामना न करना पड़े। जबकि पीड़ितों की मदद करने वालों के लिए ऐसी कोई कार्रवाई न करने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं, ताकि मददगार के लिए कोई परेशानी न हो। सरकारों को पुलिस को हिदायतें देनी चाहिए कि वह सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद करने वालों को परेशान न करे, ताकि लोग हादसे में घायल लोगों की मदद करने से न कतराएं और समय पर इलाज मिलने से कीमती जान बच सके। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाने चाहिए।

’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

असुविधा का सफर
सन 2010 में कॉमन मोबिलिटी कार्ड अपने नींव रखे जाने और फिर लंबे इंतजार के बाद लागू होने वाली थी, लेकिन यह समझना मुश्किल है कि आखिर किन वजहों से अभी तक इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं हुई है। इसकी वजह से अभी तक लोग इस योजना से वंचित हैं। मेट्रो स्मार्ट कार्ड से बस में किराया भुगतान की सुविधा होने के बाद भी यात्रियों में अनभिज्ञता है। अभी तक कुछ लोगों ने ही इसका प्रयोग किया है। ज्यादातर लोग इसके प्रयोग से वंचित हैं। वरिष्ठ परिवहन अधिकारी के मुताबिक 1650 क्लस्टर स्कीम बस और 3865 डीटीसी बसों में मेट्रो किराया भुगतान की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन जब तक इस योजना की आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं होगी, तब तक ज्यादा से ज्यादा लोग इसमें अपनी भागीदारी नहीं दे सकेंगे और डीटीसी की सेवा में सुधार नहीं हो पाएगा।
’सुनाक्षी, डॉ भीमराव आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

अनदेखी का हासिल
सड़क पर जा रही लड़कियों पर भद्दी टिप्पणियां करने वालों को जब मेरे जैसे इक्का-दुक्का लोग कभी टोकते हैं या मना करते हैं तो ऐसी हरकत करने वाले लोग उनकी ही खिल्ली उड़ाने लगते हैं। जिन्हें हम मामूली छेड़छाड़ या गंदी गाली समझ कर अनसुना करते हैं, उन्हीं से वह पहाड़ जैसी समस्या बनता है। जिसे लोग मामूली बात समझते हैं, वह अंत मे बलात्कार जैसे गंभीर अपराध के रूप में सामने आ सकता है। फब्तियां कसना, मां-बहन की गालियां निकालना जैसी आदतों के प्रति, सख्त दंड का प्रावधान करना आज आवश्यक है। स्कूलों में नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। एक कदम हमें सार्वजनिक जीवन की ओर भी बढ़ाना होगा, जहां मनुष्य को मांस में तब्दील करने का घृणित व्यापार चल रहा है। इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
’राज सचदेवा, इग्नु, दिल्ली

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