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बेरोजगारी की समस्या: आखिर समस्या कहां और क्यों है?

रोजगार बढ़ाने के लिए भारत को ‘सनराइज’ उद्योगों, मसलन खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, विनिर्माण आदि श्रम बहुल क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा। जरूरत के अनुरूप कौशल का विकास करना होगा।

Author Published on: April 26, 2018 5:05 AM
(Fe Photo)

भारत में पिछले कुछ दशकों से रोजगार विहीन विकास के बारे सवाल उठते रहे हैं। एक ओर हमारा देश विश्व में सबसे तेज गति से विकास की ओर बढ़ने वाला माना जा रहा है; हमने तमाम सूचकांकों में काफी अच्छी प्रगति की है इसके बावजूद हमारे युवा रोजगार के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। हम अपने युवाओं को उनकी आशा के अनुरूप रोजगार नहीं दे पा रहे हैं। नौबत यह है कि तमाम इंजीनियरिंग कॉलेजों से निकलने वाले स्नातक गुणवत्ता पूर्ण रोजगार के लिए तरस रहे हैं और आजीवका के लिए कम वेतन पर काम करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर देश के लिए कुशल, दक्ष लोगों की भी कमी है। आखिर समस्या कहां और क्यों है?

दरअसल, हमने अपने स्कूल-कॉलेजों में वर्षों से चले आ रहे पाठ्यक्रम को ही जारी रखा है जबकि उनमें आज की जरूरतों के अनुरूप विषयों पर जोर दिया जाना चाहिए। आज ‘बिग डाटा एनालिसिस’, ‘ऑटोमेशन’, ‘इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ जैसी चीजों की बात हो रही है और हम अपने युवाओं को 1990 के दशक के अनुरूप विषय पढ़ा रहे हैं। 1992 के बाद से हमारी शिक्षा नीति नहीं बदली गई है। पूर्व कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में नई शिक्षा नीति के लिए हमने एक समिति का गठन जरूर किया मगर उसकी सिफारिशों पर अब तक कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। इस दिशा में हमें जल्दी से विचार कर जरूरी कदम उठाने होंगे।

रोजगार बढ़ाने के लिए भारत को ‘सनराइज’ उद्योगों, मसलन खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खेती, विनिर्माण आदि श्रम बहुल क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा। जरूरत के अनुरूप कौशल का विकास करना होगा। भारत में आधारभूत ढांचे के लिए तमाम सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे, एक्सप्रेस वे, औद्योगिक गलियारे आदि से जुड़ी योजनाओं में रोजगार के लिए असीम संभावनाएं हैं। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, भारत माला, सागरमाला, उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में सुरक्षा गलियारे का विकास आदि कार्यक्रमों के जरिये सरकार ने इस दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यहां एक बात जरूर ध्यान में रखनी होगी कि रोजगार के लिए हमेशा सरकार का मुंह ताकने के बजाय जहां तक संभव हो, खुद रोजगार पैदा करने वाले बनें तो देश में बेरोजगारी की समस्या का काफी हद तक निदान हो सकता है। इसीलिए सरकार ने मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया जैसी योजनाओं के जरिए देश में निवेश और स्वरोजगार के लिए माहौल बनाया है। इनसे उम्मीद है कि आने वाले समय में बेरोजगारी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी।
’आशीष कुमार, उन्नाव, उत्तर प्रदेश

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