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हर्ष फायरिंग समेत इन समस्याओं की वजह से, शादी के खर्चे की एक सीमा बांध देनी चाहिए?

हमारे देश में शादी एक सिरदर्द के समान हो गई है। पहले तो दहेज के लेन-देन से परिवारों का दिवाला निकाला जाता है। फिर लड़की का बाप घर बेचकर/ सारी जमा पूंजी लुटाकर दिखावे के लिए शादी के इंतजाम में जरूरत से ज्यादा खर्च करता है।

Author May 7, 2018 3:40 AM
पहली पत्नी से तलाक लेने के लिए उसे कॉल गर्ल बता दिया। (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

चौपाल: शादी में बर्बादी
आजकल हर्ष फायरिंग की घटनाएं लगातार सुनने में आ रही हैं। कभी इसका शिकार बाराती होते हैं तो कभी दूल्हा ही मारा जाता है। ऐसा नहीं है कि हर्ष फायरिंग में हर बार कोई न कोई मारा जाता है लेकिन जिस तरह घटनाएं हो रही हैं उससे पता चलता है कि हर्ष फायरिंग का चलन हमारे देश में कितनी तेजी बढ़ रहा है। अफसोसनाक है कि इस फायरिंग में इस्तेमाल अधिकतर हथियार अवैध होते हैं और उन्हें चलाने वाला भी गुंडा, बदमाश या अनपढ़ से कम नहीं होता। अपनी बहादुर के चक्कर में वह किसी की जान ले लेता है। समझ नहीं आता कि हमारी सरकार करती क्या है? लगता है कि वह भी हमारी तरह खबरें ही देखती रहती है और जब तक मामला तूल न पकड़ ले वह कार्रवाई करने से बचती रहती है। हमारे देश में शादी एक सिरदर्द के समान हो गई है। पहले तो दहेज के लेन-देन से परिवारों का दिवाला निकाला जाता है। फिर लड़की का बाप घर बेचकर/ सारी जमा पूंजी लुटाकर दिखावे के लिए शादी के इंतजाम में जरूरत से ज्यादा खर्च करता है। उसके बाद शादी में अधिकतर वे सब काम भी होते हैं जो गैरकानूनी हैं चाहे वह दहेज हो, हर्ष फायरिंग हो, सड़क जाम करके नाचना गाना हो, दारू पीकर हुड़दंग मचाना या रातभर कानफोड़ू गाने बजाना हो। मां-बाप भी बेटा होने के बाद एक ही सपना संजोए रहते हैं कि शादी में सारे अरमान निकाले जाएंगे। शादी दो परिवारों के मिलन के साथ दो लोगों का एक नई जिंदगी में प्रवेश भी है। लेकिन शादी का जैसा प्रचलन हमारे यहां है वह एक तूफान के समान है जिसके गुजरने के बाद सारी चीजें उजड़ी हुई दिखाई देती हैं। लड़की का पिता कर्जे में दब जाता है तो दूल्हा नई जिंदगी शुरू होने से पहले आर्थिक रूप से हिचकोले खाने लगता है। आखिर ये शादियां संयमित तरीके से और कम खर्चें में क्यों नहीं की