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‘पार्टी के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग’ को कांग्रेस ने नकारा, 1984 के दंगों का क्या?

कांग्रेस के दामन पर सिखों सहित तमाम हिंदुओं के खून के भी दाग हैं और ये दाग कहीं ज्यादा गहरे और बड़े हैं। सन 1984 के दंगों में हजारों सिख मारे गए थे। उन हत्याओं का दाग कांग्रेस के माथे पर अभी तक लगा है।

Author April 26, 2018 5:04 AM
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद। (Reuters Photo)

अधूरी स्वीकारोक्ति
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने कहा है कि उनकी पार्टी के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग लगे हैं। चलिए, कांग्रेस का एक अपराध तो खुर्शीद साहब ने माना। पर वास्तव में यह अधूरी स्वीकारोक्ति है। कांग्रेस के दामन पर सिखों सहित तमाम हिंदुओं के खून के भी दाग हैं और ये दाग कहीं ज्यादा गहरे और बड़े हैं। सन 1984 के दंगों में हजारों सिख मारे गए थे। उन हत्याओं का दाग कांग्रेस के माथे पर अभी तक लगा है। उसके बाद 1987 से 1990 के दशक के प्रारंभिक वर्षों के बीच पहले पंजाब और फिर कश्मीर में देशवासियों का संहार हुआ। यह आंकड़ा बीस हजार का बैठता है। आज तक कभी कांग्रेस ने उस अपराध को स्वीकार नहीं किया। सिखों सहित सारे समाज को निर्मम हत्याकांडों से बचाने में इस पार्टी की विफलता बेहद निंदनीय रही है।
’आस्था गर्ग, मेरठ

पिछड़ने के पीछे
नीति आयोग के अनुसार देश के पिछड़ने का मूल कारण राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की बदहाली है। इन राज्यों में शिक्षा का गिरता स्तर, बढ़ती शिशु मृत्यु दर, नीति निर्माण में महिलाओं की न्यूनतम भागीदारी, रोजगार सृजन में गिरावट जैसी गंभीर समस्याएं व्याप्त हैं जबकि इन पांचों राज्यों में राजग की सरकार होने के कारण केंद्र व राज्य सरकारों में सामंजस्य की समस्या भी नहीं है। पिछड़ेपन के अलावा मानव विकास सूचकांक के मामले में भी 188 देशों में भारत का 133 वां स्थान है, जो चिंता का विषय है। ऐसे आंकड़े सामने आने से इन प्रदेशों के निवासी खुद को अपमानित महसूस करते हैं। आखिर कौन है इस सबका का जिम्मेदार? क्या इन प्रदेशों की जनता अथवा सत्ता की कुर्सी से चिपके नेता? कहां जाता है जनता की गाढ़ी कमाई से वसूल किया गया कर? आम लोगों के आर्थिक हालात और ज्यादा खराब होते जा रहे हैं। दूसरी तरफ जनप्रतिनिधि अवैध रूप से करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर रहे हैं। इन प्रदेशों का पिछड़ापन दूर करने के लिए सरकारों को विकास के समान अवसर सुनिश्चित करने होंगे और इन्हें भुखमरी, जातिवाद, बेरोजगारी, घाटे का सौदा बनती कृषि, भ्रष्टाचार, गरीबी जैसी समस्याओं से छुटकारा दिलाना होगा। सरकारें और विपक्षी पार्टियां भी जनहित से जुड़ी इन समस्याओं से निजात दिलाने के लिए अपनी सकारात्मक भूमिका सुनिश्चित करें नहीं तो जनता आने वाले चुनावों में नए विकल्प तलाश लेगी।

’हरेंद्र सिंह कीलका, सीकर

सम्मान के उस्ताद
भारत सरकार का अल्पसंख्यक मंत्रालय उस्ताद सम्मान दे रहा है। यह सम्मान शिल्पकारों के लिए है लेकिन इसके साथ शर्त रखी गई है कि वह शिल्पकार मुसलमान, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी और सिख ही होना चाहिए। भले ही यह सम्मान अल्पसंख्यक मंत्रालय दे, मगर अपने हर नागरिक को समानता का मौलिक अधिकार देने वाले एक लोकतांत्रिक देश की सरकार का यह कदम सरासर अनुचित लगता है। अगर किसी शिल्पकार को उस्ताद सम्मान देना है तो उसकी कारीगरी देख कर देना चाहिए न कि उसका धर्म देख कर। अगर कोई हिंदू शिल्पकार है तो उसे सम्मान न देना शिल्पकला का अपमान है। शिल्पकार के सम्मान के आवेदन में धर्म का कॉलम हटना चाहिए।
जीवन मित्तल, मोती नगर, दिल्ली

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