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चौपाल: सत्यमेव जयते

सेना के जवान सीमा पर मर रहे हैं, यह भी सत्य है और सरकार बदला लेने या ज्यादा से ज्यादा मुआवजा देने की बात करती है, यह भी सत्य है। महंगाई बढ़ रही है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं यह भी सत्य है और सरकारी वादों और कथनों का विकास हो रहा है यह भी सत्य है।

Author July 6, 2018 2:06 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

किताबों से लेकर सड़क किनारे दीवारों और पुलिस थानों से लेकर मंत्रियों के आलीशान दफ्तरों में एक वाक्य बड़े सुंदर अक्षरों में लिखा पाता हूं ‘सत्यमेव जयते’ अर्थात सत्य ही जीतता है। पर कौन-सा सत्य? क्या वह जो किताबी ज्ञान वाला है या एफआइआर में दर्ज है या वह सत्य जो सालों से कोर्ट-कचहरी की फाइलों में दफ्न है और जिसका जायका रोज दीमक उठा रही है! आज सत्य का एक अलग स्वरूप, एक अलग परिभाषा और एक अलग मानदंड है। बचपन में सुना था कि ‘सौ बार झूठ बोलने से झूठ सत्य नहीं बन जाता’ लेकिन आज सत्य ठीक वैसे ही बन जाता है जैसे मशीन में एक तरफ से कोई वाक्य डालो और दूसरी तरफ से आदर्श, सत्यनिष्ठ वाक्यों और वचनों के सर्टिफिकेट की पोटली ले लो! अब तो जो कहा जाएगा वही सत्य और वही आदर्श होगा समाज का, पूरा प्रशासन उसी से संचालित होगा!

किताबों में खूब पढ़ा था, सत्य बोलो, सदाचारी बनो; सब आपकी इज्जत करेंगे। पर सवाल वहीं आकर अटक जाता है कौन-सा वाला सत्य? बच्चियों से बलात्कार हो रहा है यह भी सत्य है और बलात्कार के आरोपी ‘बाइज्जत’ बरी हो रहे हैं यह भी सत्य है। या फिर जब केस की तारीख आती है तो पीड़िता को मरे पांच साल से ऊपर हो चुके होते हैं, यह भी सत्य है। सेना के जवान सीमा पर मर रहे हैं, यह भी सत्य है और सरकार बदला लेने या ज्यादा से ज्यादा मुआवजा देने की बात करती है, यह भी सत्य है। महंगाई बढ़ रही है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं यह भी सत्य है और सरकारी वादों और कथनों का विकास हो रहा है यह भी सत्य है। लब्बोलुवाब यह कि चारों तरफ सत्य ही सत्य है हालांकि यह किसी विशेष रंग के चश्मे से दिखेगा। लेकिन सवाल है कि वह चश्मा होगा किसका? इसका जवाब है, वह चश्मा है शिक्षा का, विश्वास का, आपसी भाईचारे का, अहिंसा का। आज कुछ सत्य ऐसे भी हैं जिन्हें हमें मिटाना है जैसे- बलात्कार, महंगाई, अशिक्षा, धर्म-जाति के नाम पर आपस में अलगाव। किसी महापुरुष ने कहा था- ‘अगर आपको परिवर्तन लाना है तो निम्न से लेकर उच्च वर्ग तक को साथ लेकर हाथ से हाथ मिला कर आना होगा।’ इसके लिए लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पुन: जनता की आवाज बन जनता के साथ मिल कर एक नए सत्य की रूपरेखा तैयार करे जिसे हम गौरव के साथ आत्मसात कर सकें और कह सकें- सत्यमेव जयते!
’तालिब हुसैन ‘रहबर’, जामिआ, दिल्ली

अच्छा प्रस्ताव

पिछले कुछ दिनों से एक प्रस्ताव देश में चर्चा का विषय बना हुआ है कि एयर कंडीशनरों की ‘डिफाल्ट सेटिंग’ को 24 डिग्री सेल्सियस कर दिया जाए। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने यह प्रस्ताव रखा है ताकि बिजली की बढ़ती खपत को कम किया जा सके। मंत्रालय के अनुसार इससे हर वर्ष देश की बीस अरब यूनिट बिजली बचेगी। भारत में एयरकंडीशनर का उपयोग करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। पहले यह विलासिता की वस्तु समझा जाता था पर आजकल बढ़ते तापमान के कारण यह एक आवश्यकता बन गया है। यदि एयरकंडीशनर की डिफाल्ट सेटिंग 24 डिग्री सेल्सियस करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई तो यह एक अच्छा प्रयास साबित होगा। लेकिन तब तक एयरकंडीशनरों का उपयोग करने वालों की संख्या भी बहुत बढ़ जाएगी और ऊर्जा की खपत भी। इसके लिए लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। एयरकंडीशनर का कम से कम प्रयोग करके बिजली की बचत की जा सकती है। साथ ही, अपने आसपास अधिक से अधिक पेड़ लगाकर एसी की बजाय ताजा हवा में रहने की आदत डालनी होगी।
’संजय डागा, हातोद, इंदौर

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