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चौपाल: श्रमिकों का शोषण

महात्मा गांधी ने कहा था कि किसी देश की तरक्की उसके श्रमिकों और किसानों पर निर्भर करती है। फिर भी भारत में श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है।

Author May 11, 2018 04:25 am
लगातार बढ़ती हुई महंगाई को देखते हुए उनके वेतन में भी निरंतर वृद्धि करने की जरूरत है।

केंद्र सरकार ने श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि करते हुए अकुशल श्रमिक को 375 रुपए, कुशल श्रमिक को 522 रुपए और अतिकुशल को 612 रुपए प्रतिदिन की दर से वेतन देने का फरमान जारी किया है लेकिन आज भी बहुत से औद्योगिक संस्थानों, कारखानों में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। श्रमिकों का शोषण निरंतर जारी है। महात्मा गांधी ने कहा था कि किसी देश की तरक्की उसके श्रमिकों और किसानों पर निर्भर करती है। फिर भी भारत में श्रमिकों को निर्धारित न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा है। इस मामले में हमें चीन से सीखने की जरूरत है जहां श्रमिकों के हित में कठोर कानून बनाए गए हैं और उनका पालन भी सख्ती से किया जाता है। एक तरफ सरकारी कर्मचारी का वेतन, महंगाई भत्ते के रूप में निरंतर बढ़ता रहता है लेकिन दूसरी ओर श्रमिकों की मजदूरी में वृद्धि का स्तर बहुत कम रहता है। लगातार बढ़ती हुई महंगाई को देखते हुए उनके वेतन में भी निरंतर वृद्धि करने की जरूरत है।
’अमित पांडेय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

असुरक्षित परिवहन
हमारी सरकारें सार्वजनिक परिवहन के सुविधाजनक और सुरक्षित होने के दावे करते हुए देश वासियों को इसके जरिए यात्रा करने की नसीहत देती रहती हैं लेकिन जब राजधानी दिल्ली जैसे शहर की बसों में दिनदहाड़े लूट और हत्या की वारदात हों तो लोग उस पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? ये घटनाएं दुखद तो हैं ही, सरकार के दावों की सच्चाई भी उजागर करती हैं। दिल्ली की डीटीसी बसों में हाल में हुई हत्या और लूट के लिए किसी को दोषी नहीं माना गया। आज इन बसों में यात्रा करना और अपनी जान को जोखिम में डालना एक समान है। ऐसे में सरकार का दायित्व है कि अपने मुंह मिया मिट्ठू बनने की बजाय सार्वजनिक परिवहन में सुरक्षा और सुविधा दोनों सुनिश्चित करे। हमारा भी कर्तव्य है कि किसी के साथ गलत होता देख उसकी मदद करें।
’अरुण कश्यप, सत्यवती कॉलेज, दिल्ली

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