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चौपाल: इनकी उपलब्धि

करीब 21600 समुद्री मील की यात्रा पूरी कर हाल ही में वे लौटी हैं। इस टीम ने कई विषम परिस्थितियों में भी अपने जीवट से अभियान जारी रखा और यह अनोखी उपलब्धि हासिल की।

करीब आठ माह के अभियान में इस टीम ने चार महाद्वीप, तीन महासागर और कई देशों के साथ भूमध्यरेखा को दो बार पार किया।(Photo courtesy: Indian Navy)

पिछले साल 10 सितंबर को आइएनएस तारिणी पोत से भारतीय नौसेना की छह महिला अफसर एक लंबी समुद्री यात्रा पर दुनिया को नापने निकलीं थीं। करीब 21600 समुद्री मील की यात्रा पूरी कर हाल ही में वे लौटी हैं। इस टीम ने कई विषम परिस्थितियों में भी अपने जीवट से अभियान जारी रखा और यह अनोखी उपलब्धि हासिल की। कई बार 150 मील प्रति घंटे की सर्द हवाओं में शून्य से पांच डिग्री नीचे के तापमान और दस मीटर ऊंची लहरों ने इनका रास्ता रोकने की कोशिश की पर इनके अदम्य साहस के आगे सब मुश्किलें बौनी साबित हुर्इं। करीब आठ माह के अभियान में इस टीम ने चार महाद्वीप, तीन महासागर और कई देशों के साथ भूमध्यरेखा को दो बार पार किया। इस अभियान को पूरा कर देश का गौरव बढ़ाने वाली महिला टीम का साहसिक कार्य निश्चित ही प्रेरणादायी है।
’संजय डागा, हातोद

कैसी गोरक्षा
अगर कोई अपनी गायें बेचने जाता है या कोई कहीं से खरीद कर गायें लाता है तो उसे गो तस्कर मान लिया जाता है। किसी व्यापारी को गो तस्कर मान हर कोई उसे मारना-पीटना शुरू कर देता है जबकि देश में गाय का व्यापार या उसे लाना-ले जाना अपराध नहीं है। अगर कोई किसी की गायें चोरी से ले जा रहा है तो पशु मालिक का रिपोर्ट लिखवाना या अपनी गायें ले जाने से रुकवाने के प्रयास करना अनुचित नहीं है। गो रक्षकों और सरकार को पहले सड़कों पर घूमती लावारिस गायों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। बहुत-सी जगहों पर इन खुली गायों का आतंक है। अगर गोरक्षा जरूरी है तो मानव रक्षा भी जरूरी है! सरकार को गाय के व्यापार और उसे लाने-ले जाने की बाबत स्थिति स्पष्ट करने वाले विज्ञापन देने चाहिए ताकि गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी न हो।
’जीवन मित्तल, मोती नगर, नई दिल्ली

मतदाता से छल
लोकतंत्र में मतदाता की सबसे बड़ी शक्ति उसका मताधिकार है। इसका प्रयोग कर वह किसी दल को उसके कार्यकाल के आधार पर दुबारा सत्ता में आने का मौका देता है या किसी अन्य विकल्प को अपनाता है। लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव के बाद किया गया गठबंधन मतदाताओं के साथ सबसे बड़ा छल है। कल जिसके विरोध में गला फाड़ कर मत मांगा आज उसी के साथ खड़े होकर ये पार्टियां मतदाताओं के फैसले पर अट्टहास करती नजर आती हैं। क्या यह लोकतंत्र की हत्या नहीं है? जब-जब सत्ता के लालच में राजनीतिक पार्टियां ऐसे गठबंधन करती रहेंगी, तब-तब मासूम मतदाता खुद को लाचार और ठगा हुआ महसूस करते रहेंगे।
’शुभेंद्र सिंह, लक्ष्मीनगर, नई दिल्ली

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