ताज़ा खबर
 

भारत में धड़ल्ले से बिक रही हैं नकली दवाएं, जांच के लिए लैब भी कम पड़ीं: रिपोर्ट

भारत न सिर्फ नकली दवाओं के एक बड़े उत्पादक देश के रूप में बदनाम हो रहा है, बल्कि ऐसी दवाओं को खपाने का बड़ा अड्डा भी बनता जा रहा है। यही वजह है कि चीन, नेपाल और म्यांमा से भी बड़ी संख्या में नकली दवाएं भारत आ रही हैं।

Author May 10, 2018 04:48 am
सांकेतिक तस्वीर।

चौपाल: मौत का कारोबार

एक इंसान जब बीमार पड़ता है तो डॉक्टर और दवा इन्हीं दोनों पर उसकी सारी उम्मीदें टिकी होती हैं। गरीब से गरीब आदमी भी पैसे की चिंता न करते हुए अच्छे से अच्छे डॉक्टर से इलाज कराना चाहता है। इतने प्रयास के बावजूद यदि दवा ही नकली हो, तो इसमें धरती का वह ‘भगवान’ भी भला क्या करेगा! हाल ही में आई विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में दस में से एक नकली या घटिया दवा की सप्लाई होती है। दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विश्व में कुछ दवा मानक एजेंसियां हैं। लेकिन भारत में विश्व स्तर की इन मानक एजेंसियों से मान्यता प्राप्त दवा संयंत्र बहुत ही कम हैं। दुख की बात है कि भारत में ऐसा कोई नियामक प्राधिकरण नहीं है। देश में दवाओं की गुणवत्ता जांचने के लिए प्रयोगशालाओं की भारी कमी है। इसके चलते यह पता करना अत्यंत कठिन है कि बाजार में चल रही कौन-सी दवा असली है और कौन-सी नकली।

एक विडंबना यह भी है कि सरकार के पास न तो पर्याप्त संख्या में ड्रग इंस्पेक्टर हैं और न ही नमूनों की जांच के लिए सक्षम प्रयोगशालाएं हैं। नकली दवा माफिया इस कदर हावी है कि उसे केंद्रीय औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम के गैर जमानती और आजीवन कारावास जैसे सख्त प्रावधानों की भी परवाह नहीं है। सात साल पहले किए गए केंद्र सरकार के एक फैसले के बाद बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में आसानी से सस्ती दर पर पूरी सुरक्षा के साथ दवा परीक्षण कर सकती हैं। मुक्त बाजार की उदारवादी व्यवस्था का असर यह है कि आज देश के दवा बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की भागीदारी सत्तर प्रतिशत से भी ज्यादा है।

भारत न सिर्फ नकली दवाओं के एक बड़े उत्पादक देश के रूप में बदनाम हो रहा है, बल्कि ऐसी दवाओं को खपाने का बड़ा अड्डा भी बनता जा रहा है। यही वजह है कि चीन, नेपाल और म्यांमा से भी बड़ी संख्या में नकली दवाएं भारत आ रही हैं। हैरत तो यह है कि केंद्र सरकार भी यह स्वीकार कर रही है कि बाजार में नकली दवाएं बिक रही हैं। लेकिन बावजूद इसके इस नेटवर्क को ध्वस्त करने की खास कोशिश न तो सरकारी स्तर पर हो रही है और न ही प्रशासनिक स्तर पर। देश में नकली दवाओं का नासूर कड़े कानून से ही रोका जा सकता है, वरना मौत के सौदागर लोगों के जीवन से इसी तरह खिलवाड़ करते रहेंगे। इस दिशा में विशेष कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
’देवेंद्रराज सुथार, बागरा, जालोर, राजस्थान

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App