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चौपाल: अनदेखी की आपदा

केरल की त्रासदी अब देश के इतिहास में दर्ज हो चुका है। ऐसी आपदाओं को नियंत्रित करना आज सरकार के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हो चुका है। जलवायु परिवर्तन के कारण असामान्य मानसून की बारिश से बाढ़ का खतरा उत्पन्न होता है। हमारे देश में किसी स्थान पर बारिश बहुत ज्यादा तो कहीं बहुत कम होती है।

Author August 25, 2018 2:03 AM
31 अगस्त 2011 को केंद्र सरकार को रिपोर्ट समिति ने सौंप दी थी, जिसमें माधव गाडगिल ने केरल में बाढ़ की आशंका जताई थी।

केरल में आई बाढ़ ने पूरे देश को झकझोर के रख दिया है। इससे भारी पैमाने पर जन-धन की हानि हुई। सैकड़ों की संख्या में लोगों की जान गई। अब तक बचाव कार्य चल रहे हैं। ऐसी आपदा को रोकना मुश्किल है, लेकिन उनको नियंत्रित किया जा सकता है। ऐसी आपदाओं से उबरने में किसी राज्य को बरसों लग जाते हैं। मालूम हो कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मार्च 2011 में पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ समिति का गठन किया था और माधव गाडगिल इसके प्रमुख थे। 31 अगस्त 2011 को केंद्र सरकार को रिपोर्ट समिति ने सौंप दी थी, जिसमें माधव गाडगिल ने केरल में बाढ़ की आशंका जताई थी। उस समय उस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया था। आज इस रिपोर्ट की चर्चा पूरे देश में है।

माधव गाडगिल मशहूर पर्यावरणविद हैं। इन्होंने कहा है कि गोवा में पर्यावरण को लेकर एहतियात नहीं बरता गया तो वहां भी केरल जैसा हश्र हो सकता है। हमारी सरकार भी तब तक जागरूक नहीं होती है, जब तक किसी चीज के गंभीर दुष्परिणाम सामने न आ जाएं। अगर गाडगिल रिपोर्ट पर सरकार ने पहले ध्यान दिया होता तो शायद यह नौबत नहीं आती। आखिर क्या मतलब हुआ समिति गठित करके इतने पैसे खर्च करने का, जब उस रिपोर्ट पर अमल न किया जाए।

केरल की त्रासदी अब देश के इतिहास में दर्ज हो चुका है। ऐसी आपदाओं को नियंत्रित करना आज सरकार के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हो चुका है। जलवायु परिवर्तन के कारण असामान्य मानसून की बारिश से बाढ़ का खतरा उत्पन्न होता है। हमारे देश में किसी स्थान पर बारिश बहुत ज्यादा तो कहीं बहुत कम होती है। वन क्षेत्रों में कमी भी इसका मुख्य कारण है। जाहिर है, हमें पर्यावरण को दुरुस्त करने के अलावा नदियों का राष्ट्रीयकरण करने की जरूरत है। मशहूर वैज्ञानिक डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने सुझाव दिया था कि भारत की सभी नदियों को एक साथ जोड़ा जाना चाहिए, जिस पर तटबंध और बांध का निर्माण किया जाना चाहिए। भारत के कई क्षेत्रों में पानी की बहुत किल्लत है तो कई क्षेत्रों में ज्यादा मात्रा में पानी है। अगर देश की सभी नदियों को जोड़ दिया जाए तो ऐसी समस्या से निपटा जा सकता है।
’अमित पांडेय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

अटूट डोर
रक्षाबंधन का त्योहार सावन माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन का विशेष महत्त्व है। ये सिर्फ त्योहार नहीं है, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते को मजबूती प्रदान करने वाला मुख्य आधार है। यह भाई-बहन के रिश्ते की अटूट डोर का प्रतीक है, भावनाओं और संवेदनाओं का त्योहार है। लेकिन मेरा मानना है कि रक्षा बंधन को केवल भाई-बहन तक ही सीमित रखना सही नहीं होगा। आज के परिपेक्ष्य में राखी केवल बहन का रिश्ता स्वीकारना नहीं है, बल्कि जो भी यह श्रद्धा और विश्वास का धागा बांधता है, वह राखी बंधवाने वाले व्यक्ति के दायित्वों को स्वीकार करता है। उस रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने की कोशिश करता है। आज बहनें भी एक-दूसरे को राखी बांधती हैं। दोस्त और गुरु-शिष्य भी इस त्योहार को मनाने लगे हैं। इस तरह आज रक्षाबंधन एक व्यापक नजरिया प्रस्तुत करता है। लेकिन इसकी अहमियत तभी सिद्ध होगी, जब हम अपनी संवेदनाओं को मानवीय संबंधों को बचाने में अपनी भूमिका निभाएं।
’गीता आर्य, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश

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