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चौपाल: चिंगारी का खेल

आतंकी संगठन अपनी सारी गतिविधियां सिख फार जस्टिस नाम से गठित संगठन के छद्मावरण में चला रहे हैं। यह संगठन पंजाब में चले आतंकवाद के दौरान भगोड़े अलगाववादी व खालिस्तानी आतंकियों द्वारा चलाया जा रहा है।

Author August 29, 2018 3:04 AM
भारत ने करीब डेढ़ दशक तक पंजाब के आतंकवाद को झेला है और इसकी भारी कीमत चुकाई है।

विदेशी धरती पर खालिस्तानी अलगाववादियों की बढ़ती गतिविधियों की अब और अनदेखी करना शुतरमुर्ग की नीति का अनुसरण करना होगा जो खतरे को सामने देख कर रेत में सिर छिपा लेता है। हाल ही में अकाली दल बादल के नेता मनजीत सिंह जीके और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के विदेशी दौरे के दौरान खालिस्तानी तत्त्वों ने नारेबाजी करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया। अलगाववादियों व पूर्व आतंकियों द्वारा संचालित संगठन सिख फार जस्टिस की बढ़ी सक्रियता ने देशवासियों को चिंता में डाल दिया है और अफसोस की बात यह कि इस संगठन को राजनीतिक संरक्षण भी मिलना शुरू हो चुका है। ब्रिटेन की वामपंथी विचारधारा वाली ग्रीन पार्टी भारत विरोधी इस लॉबी के समर्थन में खुल कर आ गई है और पार्टी की उपनेता कैरोलीन ल्यूकस का कहना है कि अलगाव की मांग कर रहे खालिस्तानियों को भी अपने भाग्य के फैसले का अधिकार मिलना चाहिए।

अमेरिका के कैलिफोर्निया में खालिस्तानी तत्त्वों ने दिल्ली सिख गुरद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष व अकाली दल के नेता मनजीत सिंह पर जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना के चार दिन पहले इन्हीं तत्त्वों ने उन पर न्यूयार्क में भी हमला किया था। हाल ही में पूर्व आतंकवादी परमजीत सिंह पम्मा के नेतृत्व में सिख फार जस्टिस द्वारा लंदन में जनमत 2020 के समर्थन में रैली की जा चुकी है। चाहे इस रैली को सिख समाज की ओर से उतना सकारात्मक जवाब नहीं मिला और भारतीयों ने इसके समांतर भारत समर्थक रैली करके अलगाववादियों का मुंहतोड़ जवाब देने का प्रयास किया लेकिन इतना तो साफ हो चुका है कि खालिस्तानी तत्त्व हाथ पर हाथ धर कर नहीं बैठे हैं। वे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और ब्रिटेन में मिले राजनीतिक समर्थन से भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

कुछ समय पहले जर्मनी में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया गया और जांच के दौरान सामने आया कि यूरोप में इन आतंकी संगठनों की गतिविधियां बढ़ रही हैं और इन्हें ब्रिटेन की वामपंथी ग्रीन पार्टी का राजनीतिक समर्थन हासिल है। आतंकी संगठन अपनी सारी गतिविधियां सिख फार जस्टिस नाम से गठित संगठन के छद्मावरण में चला रहे हैं। यह संगठन पंजाब में चले आतंकवाद के दौरान भगोड़े अलगाववादी व खालिस्तानी आतंकियों द्वारा चलाया जा रहा है। इसमें भारत से गए लोगों की दूसरी पीढ़ी के युवा भी शामिल हैं जो मूल रूप से तो पंजाबी या भारतीय हैं पर उनका जन्म और लालन-पालन विदेशी धरती पर ही हुआ। इसके अलावा विदेशों में अवैध तरीके से जाने वाले पंजाबी युवकों को सिख फार जस्टिस शरण देकर अपने साथ मिलाने का काम करता है। पंजाब में पिछले कुछ सालों में हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व हिंदू संगठनों के नेताओं की हत्या के पीछे इसी तरह के युवाओं का हाथ बताया गया है और कई अनिवासी भारतीय युवा गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

खालिस्तानियों की इस बढ़ रही खुराफात पर न तो रक्षात्मक होने की आवश्यकता है और न ही भयभीत, बल्कि इसका दृढ़ता से जवाब देना समय की मांग है। ब्रिटेन व अमेरिका जैसे मुल्क इस तर्क की आड़ में अपनी धरती पर आतंकवाद का पोषण होने नहीं दे सकते कि उनके यहां लोकतांत्रिक तरीके से किसी भी तरह की मांग रखने का अधिकार है। इस अधिकार के नाम पर कोई देश कैसे अपने मित्र देश में अंगारे फेंकने वालों को पलने व बढ़ने दे सकता है! भारत सरकार को इन्हें पोषित करने वालों को चेताना होगा कि चिंगारी का खेल बुरा होता है।
’राकेश सैन, रंधावा मसंदा, जालंधर

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