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चौपाल: असंगत तुलना

नेहरूजी ने एक बार अमेरिका में संघ की तुलना वहां के आतंकी संगठन कू क्लक्स क्लान से कर दी थी, तब इस सवाल पर वे कुछ जवाब नहीं दे पाए थे कि उससे निपटने के लिए वे क्या कर रहे हैं, उन्होंने क्यों 1949 में उस पर से प्रतिबंध हटाया?

Author August 28, 2018 2:37 AM
लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज में लोगों को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फोटो-twitter/@INCIndia)

इधर आरएसएस केरल में बाढ़-राहत कार्य में लगा हुआ था, उधर राहुल गांधी यूरोप में उसकी तुलना मुसलिम ब्रदरहुड नामक आतंकी संगठन से कर रहे थे। राहुल क्या इस ब्रदरहुड के द्वारा किया गया कोई सेवाकार्य बता सकते हैं? अपने देश मिस्र के दो राष्ट्रपतियों अनवर सादात और होस्नी मुबारक को मारने वाले दल के रूप में कुख्यात यह संगठन मिस्र में ही नहीं, सात अन्य देशों में भी प्रतिबंधित है। यदि संघ उस जैसा है तो कहीं पर भी बंदिशें क्यों नहीं झेल रहा? उनके पड़नाना जवाहरलाल नेहरू ने उसे 1963 की गणतंत्र दिवस परेड में क्यों शामिल कर लिया? लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 के युद्ध के दौरान दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था और अग्रिम मोर्चों पर सेना के लिए कैंटीन चलाने का काम आरएसएस को क्योंकर सौंप दिया? यूपीए सरकार ने उस पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया?

नेहरूजी ने एक बार अमेरिका में संघ की तुलना वहां के आतंकी संगठन कू क्लक्स क्लान से कर दी थी, तब इस सवाल पर वे कुछ जवाब नहीं दे पाए थे कि उससे निपटने के लिए वे क्या कर रहे हैं, उन्होंने क्यों 1949 में उस पर से प्रतिबंध हटाया? यह आज तक स्पष्ट नहीं हो सका कि एक संगठन से राहुल या उनके परिवार को क्या समस्या है?
’अजय मित्तल, मेरठ

नैयर का जाना
ख्याति प्राप्त पत्रकार व लेखक कुलदीप नैयर के निधन से भारतीय पत्रकारिता और मीडिया जगत के साथ ही अनेक बेहद सार्थक सामाजिक सरोकारों की भी गंभीर क्षति हुई है। वे अमन व लोकतांत्रिक अधिकारों के अनेक सरोकारों से इतने नजदीकी तौर पर जुड़े रहे कि इन विषयों पर आयोजित कई सम्मेलन उनकी उपस्थिति के बिना अधूरे ही माने जाते थे। वे भी इन सामाजिक सरोकारों के लिए इतने प्रतिबद्ध थे कि स्वास्थ्य समस्याओं की परवाह न करते हुए इन सम्मेलनों में जरूर पहुंचते थे और वहां उपस्थित सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करते थे।

चाहे विभिन्न धर्मों की आपसी सद्भावना का मुद्दा हो या पड़ोसी देशों से संबंध बेहतर करने का, या सूचना के अधिकार की रक्षा का सवाल हो अथवा प्रेस की स्वतंत्रता का, कुलदीप नैयर ऐसे कितने ही सार्थक सरोकारों से जुड़े रहे व इन्हें आगे बढ़ाने में सहायता करते रहे। उनके इन विभिन्न स्तरों के अमूल्य योगदान को सदा याद रखा जाएगा।
’भारत डोगरा, पश्चिम विहार, नई दिल्ली

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