jansatta Choupal World Breastfeeding Week: Only 39% of babies in India have the fortune of breastfeeding - विश्व स्तनपान सप्ताह: भारत में केवल 39 फीसद शिशुओं को नसीब होता है मां का दूध - Jansatta
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चौपाल: यह जरूरत

दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं की जरूरत समझते हुए इस बाबत एक महीने के अंदर सरकार से जवाब भी मांगा है। यदि बस अड्डे, अस्पताल, मुख्य बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों में ‘ब्रेस्ट फीडिंग कॉर्नर’ की सुविधा मुहैया करा दी जाए तो उससे माताओं को न सिर्फ स्तनपान कराने में सहूलियत होगी बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

Author August 4, 2018 2:03 AM
प्रतीकात्मक चित्र

विश्व भर में जहां सार्वजनिक स्थलों पर माताओं को अपने शिशुओं को स्तनपान कराने की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है वहीं भारत इस मामले में अन्य देशों से बहुत पीछे है। यहां के हवाई अड्डों पर भी महिलाओं के अपने बच्चों को स्तनपान कराने का कोई प्रबंध नहीं है। डॉक्टर्स के मुताबिक मां को छह महीने तक शिशु को स्तनपान कराना आवश्यक है जो कि नवजात शिशु का संपूर्ण आहार होता है। एक सर्वे के मुताबिक भारत में केवल 39 फीसद ऐसे शिशु हैं जो मां का दूध पी पाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए और माताओं को अपने बच्चे के स्तनपान के प्रति जागरूक करने के लिए दुनिया के 120 से ज्यादा देशों में हर साल 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह का आयोजन किया जाता है।

भारत में सार्वजनिक स्थलों पर अपने शिशुओं को स्तनपान कराने की सुविधा न होने से महिलाओं के निजता व संवैधानिक अधिकारों का हनन होता है। आज भी वे खुले में बच्चों को स्तनपान कराने में हिचकिचाती हैं। इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार और महिला बाल विकास विभाग को स्वयं उचित कदम उठाने चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं की जरूरत समझते हुए इस बाबत एक महीने के अंदर सरकार से जवाब भी मांगा है। यदि बस अड्डे, अस्पताल, मुख्य बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों में ‘ब्रेस्ट फीडिंग कॉर्नर’ की सुविधा मुहैया करा दी जाए तो उससे माताओं को न सिर्फ स्तनपान कराने में सहूलियत होगी बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
’गुल अफ्शा, आंबेडकर कॉलेज, नई दिल्ली

खोखले दावे
दिल्ली में मेट्रो को चले हुए काफी वर्ष बीत चुके हैं। सभी लोग अब मेट्रो को अपनी पहली पसंद मानते हैं और मानें भी क्यों न! मेट्रो भी तो यात्रियों की सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन आजकल इसके बड़े-बड़े दावे खोखले साबित होते नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि दिल्ली में मेट्रो अब कहीं भी इलेक्ट्रॉनिक खराबी के कारण आधे से एक घंटा तक रुक जाती है जिसके कारण सवेरे जल्दी ऑफिस जाने वाले लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मेट्रो की खराबी के कारण लोग बीच में ही अटक जाते हैं और बाहर भी नहीं आ पाते। अगर मेट्रो स्टेशन पर पहुंच भी जाती है तो पैसे की दोगुनी मार का सामना करना पड़ता है क्योंकि ज्यादा भीड़ देख कर आटो वाले भी ज्यादा किराया मांगने लगते हैं।
बरसात के मौसम ने तो मेट्रो की सफाई व्यवस्था को भी खोखला साबित कर दिया। बहुत सारे स्टेशनों पर जल भराव की समस्या रहती है तो कहीं छत से पानी टपकता रहता है। इससे यात्रियों को चलने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। टोकन मशीनें खराब होने के कारण यात्रियों की लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। इन तमाम परेशानियों के जिस कारण आजकल मेट्रो में यात्रियों को बहुत असुविधा होती है लेकिन फिर भी उसका कहना है कि हम यात्रियों को बहुत अच्छी सुविधाएं देते हैं!
’मौहम्मद अली, दिल्ली

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