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चौपाल – अपराध मुक्त कब

हत्या व महिलाओं के साथ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश पहले और बिहार दूसरे स्थान पर रहे। उत्तर प्रदेश में कुल 14.5 फीसद हत्या व महिलाओं से संबंधित 16.5 फीसद अपराध हुए।

Author February 12, 2018 2:24 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)

हाल ही में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट से देश में अपराधों के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसके अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल देश में कुल अपराधों में दस फीसद की बढ़ोतरी हुई है और राजधानी दिल्ली अपराधियों के लिए सबसे उपयुक्त जगह साबित हो रही है, जहां देश में हुए कुल अपराधों के 33 फीसद मामले दर्ज किये गए। इसके अलावा अपहरण और बलात्कार के मामलों में भी दिल्ली पहले पायदान पर रही। राजधानी महिलाओं के लिए कितनी असुरक्षित है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बलात्कार की 40 फीसद वारदातें अकेले दिल्ली में सामने आर्इं। यही नहीं, एक अन्य सर्वे मे दिल्ली के 50 फीसद लोगों ने माना था कियह शहर बुजुर्गों-महिलाओं के बिलकुल रहने लायक नहीं है, जबकि मुंबई के बारे में ऐसा वहां के सिर्फ 18 फीसद लोग मानते हैं।

देश को हिला कर रख देने वाले निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लंबे-चौड़े वादे किए गए, लेकिन पांच साल बाद आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अगर अन्य राज्यों की बात करें तो हत्या व महिलाओं के साथ अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश पहले और बिहार दूसरे स्थान पर रहे। उत्तर प्रदेश में कुल 14.5 फीसद हत्या व महिलाओं से संबंधित 16.5 फीसद अपराध हुए। कुछ ऐसी ही स्थिति हरियाणा व मध्यप्रदेश की रही। रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को अंजाम देने वालों में 94.6 प्रतिशत आरोपी पीड़ित के परिजन या जानकार ही थे, जिनमें कहीं-कहीं तो दादा, पिता, भाई और बेटे तक शामिल थे।

अपराधों में साल-दर-साल हो रही इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण अपराधियों में कानून का डर न होना है। आरोपी पैसे व राजनीतिक रसूख के बल पर न सिर्फ आसानी से कड़ी सजा से बच जाते हैं, बल्कि फिर से हिंसक वारदातों को अंजाम देने लगते हैं। इसके अलावा पीड़ित पक्ष व गवाहों को डरा-धमका कर मुकदमे वापस लेने का दबाव भी बनाया जाता है। लंबी अदालती कार्यवाही, सामाजिक दबाव और कोर्ट द्वारा संदेह का लाभ देकर बरी किए जाने से भी आरोपियों के हौसले बुलंद होते हैं। सरकारें भी इस महत्त्वपूर्ण मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेतीं और न ही उनके चुनावी एजेंडे में इसे प्रमुखता से देखा जाता है।
अजकल ‘गंदगी मुक्त भारत’, ‘खुले में शौच मुक्त भारत’ जैसे अनेक अभियान चल रहे हैं, लेकिन ‘अपराध मुक्त भारत’ जैसे अति महत्त्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार गंभीर नहीं है। ऐसे में जरूरत है, अपराधियों के साथ सख्ती से पेश आने व कड़े से कड़े कानून बनाने की। त्वरित अदालतों का गठन हो जिससे अपराधियों को जल्द कड़ी से कड़ी सजा और पीड़ितों को न्याय मिल सके। तभी हम अपराध मुक्त व अतुल्य भारत बनाने का सपना साकार कर सकते हैं।
’मो० ताहिर शब्बीर, सिकंदराबाद, बुलंदशहर

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