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चौपालः विषाणु का खात्मा

एक सौ पैंतीस करोड़ आबादी वाले भारत जैसे देश में यह शोध क्या सही साबित होगा, जहां जगह-जगह लोग पूर्णबंदी का उल्लंघन कर रहे हैं, जहां लोग धैर्य और अनुशासन की परिभाषा नहीं समझते, वहां क्या वाकई इक्कीस मई को कोरोना विषाणु का खात्मा हो जाएगा।

अगर यह दावा सही साबित होता है तो सिंगापुर यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा क्रांतिकारी बदलाव देखे जा सकते हैं।

भारत में इक्कीस मई तक खत्म हो सकता है कोरोना विषाणु। यह सिंगापुर यूनिवर्सिटी के एक शोध में कहा गया है। इस शोध में भारत में कोरोना विषाणु के फैलने की रफ्तार का विश्लेषण किया गया है। अगर यह दावा सही साबित होता है तो सिंगापुर यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा क्रांतिकारी बदलाव देखे जा सकते हैं। लेकिन सवाल है कि एक सौ पैंतीस करोड़ आबादी वाले भारत जैसे देश में यह शोध क्या सही साबित होगा, जहां जगह-जगह लोग पूर्णबंदी का उल्लंघन कर रहे हैं, जहां लोग धैर्य और अनुशासन की परिभाषा नहीं समझते, वहां क्या वाकई इक्कीस मई को कोरोना विषाणु का खात्मा हो जाएगा।
-संजय कुमार सिंह, धनबाद (झारखंड)

कुदरत की मार
कोरोना को लेकर देश भर में पूर्णबंदी है। पूर्णबंदी की मार झेल रहे किसानों पर कुदरत की दोहरी मार पड़ी है। बेमौसम बरसात के वजह से खेतों और सड़कों पर जल जमाव हो गया है। इस वजह से खेतों में कटाई के बाद भी गेहूं के दाने किसानों के घर नहीं पहुंच पा रहे हैं। हाल की बारिश, ओलावृष्टि से खेतों में तैयार गेहूं की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में काट कर रखे गए गेहूं की बालियां कहीं काली पड़ गई हैं, तो कहीं अंकुरित होने लगी हैं।
इससे किसानों की सारी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। किसान प्रकृति की इस मार के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। सरकार और संबंधित अधिकारियों को उचित सर्वे करा कर किसानों को तत्काल मुआवजा देना चाहिए।
-नीतीश कुमार पाठक, औरंगाबाद (बिहार)

जान जोखिम में
दिल्ली नगर निगम चाहे कितने भी दावे क्यों न करे, लेकिन उसके दावों की पोल स्वास्थ्यकर्मी ही खोल दे रहे हैं। उत्तरी दिल्ली के अंतर्गत आने वाले रोहिणी क्षेत्र में स्वास्थ्य कर्मियों को विभाग की ओर से किसी भी प्रकार के कोई सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जा रहे हैं, यहां तक कि मास्क और हाथों के दस्ताने तक नहीं दिए जा रहे। दिल्ली नगर निगम चाहे कितने भी दावे करे कि उसके यहां उपकरण और मास्क उपलब्ध हैं, लेकिन दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई कर्मचारी और स्वास्थ्य कर्मी जो कार्य कर रहे हैं, उन्हें जान जोखिम में डाल कर काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है। कोरोना महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को लगातार काम पर जाना पड़ रहा है। लेकिन विभाग की इस तरह की लापरवाही इनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
-विजय कुमार धनिया, दिल्ली

सुरक्षा की पहल
हरियाणा सरकार ने राजधानी दिल्ली से लगते चार जिलों- सोनीपत, झज्जर, फरीदाबाद गुरुग्राम- की सीमाएं सील करने का जो कठोर निर्णय लिया है, उससे कुछ समय के लिए बेशक कुछ लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा, लेकिन कोरोना विषाणु को फैलने से रोकने के लिए इसके अलावा कोई चारा नहीं था। हरियाणा के इन इलाकों में पिछले दिनों संक्रमण के जो मामले सामने आए हैं, वे दिल्ली से आए लोगों की वजह से फैले हैं। हरियाणा सरकार के इस फैसले से लोगों को आने-जाने और जरूरी सामान की आपूर्ति में मुश्किलें तो होंगी, लेकिन इन जिलों में कोरोना के संक्रमण को रोकने में काफी हद तक सहायता मिलेगी। हालांकि आवश्यक सेवाओं के लिए हरियाणा सरकार ने जांच के उपरांत प्रवेश को कानूनी दायरे में सुनिश्चित कराने का भरोसा दिया है। दिल्ली और हरियाणा सरकार को सीमा पर आवाजाही चालू करने के लिए मिल-बैठ कर उचित रास्ता निकालने के बारे में विचार करना चाहिए।
-युगल किशोर शर्मा, खांबी (फरीदाबाद)

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