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चौपालः धुएं में फिक्र

निकोटिन के सेवन को अत्यधिक नशे की लत के अलावा गंभीर दुष्परिणाम के लिए जाना जाता है। यह हृदय, प्रजनन प्रणाली, फेफड़े, गुर्दे आदि पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। निकोटिन का सेवन ऐसी लत है कि अगर कोई इससे छुटकारा पाना चाहे तो यह आसान नहीं है।

Author Published on: February 26, 2020 1:15 AM
यमुना का पानी साठ प्रतिशत तक साफ हो गया है।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का यह सराहनीय फैसला है, जिसमें हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में रसायनिक निकोटिन पर एक जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसका सख्ती से अनुपालन का भी आदेश अदालत ने दिया है। कोर्ट ने इसका उपयोग अपराध की श्रेणी में रखा है। तंबाकू उत्पादों में रसायनिक निकोटिन इसलिए मिलाया जाता है कि उसकी ताकत को ओर अधिक बढ़ाया जा सके। निकोटिन के सेवन को अत्यधिक नशे की लत के अलावा गंभीर दुष्परिणाम के लिए जाना जाता है। यह हृदय, प्रजनन प्रणाली, फेफड़े, गुर्दे आदि पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। निकोटिन का सेवन ऐसी लत है कि अगर कोई इससे छुटकारा पाना चाहे तो यह आसान नहीं है।
देश के कई राज्यों में पान मसाला और गुटका पर, जिसमें तम्बाकू का मिश्रण होता है, पिछले वर्षों में इसके उत्पादन, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक लगाई गई है। हरियाणा की बात की जाए तो वर्ष 2012 में गुटका, पान मसाला जर्दा तम्बाकू और निकोटिन से बने चबाने वाले अन्य उत्पादों पर प्रदेश सरकार ने पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, पर खुले आम धड़ल्ले से यह बिक रहा है। लगभग यही स्थिति दूसरे राज्यो की भी है। तम्बाकू मौत और असाध्य बीमारियों का मुख्य कारक है। अगर उच्चतम न्यायालय रसायनिक निकोटिन के साथ-साथ प्राकृतिक निकोटिन पर भी प्रतिबंध लगा देता तो यह सोने पर सुहागे का काम करता।
’सुरेश गोयल धूप वाला, हिसार, हरियाणा

दीवार के पीछे
दीवार भी एक कमाल की चीज है। जब वह किसी मकान का हिस्सा होती है तो उससे एहसास जुड़ जाते हैं, लेकिन अगर वही दीवार आपको छिपाने के लिए हो जाए, तो एहसास खत्म हो जाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा के मद्देनजर अमदाबाद में हवाई अड्डे और स्टेडियम के बीच पड़ने वाली झुग्गी बस्ती के बाहर दीवार खड़ी कर दी गई है, ताकि दीवार के पार की झुग्गी बस्ती नहीं दिखे। दीवार में पेंटिंग बनाई गई, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी को आमने-सामने दिखाया गया। दीवार में और भी वास्तुकला देखने को मिली, जैसे भारत के राष्ट्रीय पक्षी और अमेरिका के राष्ट्रीय पक्षी भी हैं। दरअसल, इन चमकती दीवारों के पीछे कई कहानियों को छिपाने का प्रयास किया गया है। दीवार के पीछे गरीबी, अशिक्षित, स्वास्थ्य आदि जैसे बुनियादी चीजों से महरूम बस्ती को दीवार से ढक दिया है।
’मोहम्मद शादाब, नई दिल्ली

कथनी-करनी
वे पहले आधार कार्ड का विरोध करते थे। अब उसे हर काम के लिए अनिवार्य कर दिया। वे जीएसटी का विरोध करते थे, उसे ‘क्रांतिकारी परिवर्तन’ के रूप पेश कर दिया। वे सौ फीसदी विदेशी निवेश का विरोध करते थे, उसे पूरी तरह लागू कर दिया। वे निजीकरण का विरोध करते थे, अब एक-एक करके सब कुछ बेचना शुरू कर दिया। एयर इंडिया से लेकर रेलवे तक जो लगातार घाटा में है, उसे निजी हाथों को सौंपने में कोई बुराई नहीं समझी। लेकिन जो एलआइसी लगातार मुनाफे में है, करोड़ो रुपए का लाभांश हर वर्ष सरकार को देती रही है। बयालीस करोड़ बीमा धारकों का अटूट विश्वास है। मतलब सत्तर फीसद बीमा बाजार में इसका राज था। इसे बेचने की मजबूरी से पता चलता है की देश की माली हालत एकदम खराब है। अगर ऐसा नहीं होता तो क्या सरकार को एक-एक करके इन विरासतों को इस हालत में जाने देने की जरूरत पड़ती?
’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

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