ताज़ा खबर
 

चौपालः सिद्धांतों की बलि

भाजपा ने कांग्रेस से मिलावट कर निश्चित ही उन लाखों कार्यकर्ताओं और उनके स्वाभिमान को चोट पहुंचाई, जो विचारधारा और सिद्धांतों की लड़ाई लड़ते-लड़ते अपना पूरा जीवन अपनी पार्टी पर न्योछावर कर चुके हैं।

इसमें कोई दो मत नहीं कि धरती पर भगवान का रूप कहे जाने वाले डाक्टरों की जिंदगी इन दिनों दाव पर लगी है।

पिछले दिनों मप्र में चला राजनीति घटनाक्रम काफी दिलचस्प रहा। कांग्रेस की सरकार को अस्थिर करने के लिए कांग्रेस के ही लोगों ने पूरी ताकत लगा दी। भाजपा से हाथ मिलाकर कांग्रेस के विधायकों ने उन्हीं का घर उजाड़ दिया और अपना महल बना कर खुश हो गए। सत्ता और स्वाभिमान के इस खेल में निष्ठा और समर्पण पूरी तरह हार गए। कांग्रेस और भाजपा, जो सिद्धांतों की दुहाई देते थे, वे अपने रास्तों से भटक गए। दोनों ही दलों की विचारधारा और निष्ठा गायब हो गई। मूल विचारधारा के लोग गायब हो गए ओर शून्य विचारधार के लोग प्रभावी हो गए। दोनों ही दलों के निष्ठावान ठगे गए। भाजपा ने कांग्रेस से मिलावट कर निश्चित ही उन लाखों कार्यकर्ताओं और उनके स्वाभिमान को चोट पहुंचाई, जो विचारधारा और सिद्धांतों की लड़ाई लड़ते-लड़ते अपना पूरा जीवन अपनी पार्टी पर न्योछावर कर चुके हैं। लोकतंत्र और प्रजातंत्र जैसे शब्द सिर्फ नाम के रह गए। नई पीढ़ी, जो राजनीति में दखल दे रही है, वह लालच और धनलिप्सा की ओर बढ़ती जा रही है। आज नहीं तो कल, मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। मुख्यमंत्री को अपने मंत्रिमंडल में निष्ठावान साथियों को तवोज्जो देनी होगी। शुद्ध के युद्ध में भाजपा के उन विधायकों का भी ध्यान रखना होगा कि कहीं वे इस युद्ध में शहीद न हो जाएं? भाजपा की सरकार से जनता को खूब उम्मीदे हैं। नई सरकार के मुखिया को दूसरे दल से आए माननीयों को संतुष्ट करना चुनौती भरा काम होगा, तो अपनों को खुश करना टेढ़ी खीर।
-शिरीष सकलेचा, सदर बाजार, बड़ावदा, मप्र

अंधी होड़
एक महान इतिहासकार ने कहा है कि ‘दो विश्व युद्ध हो चुके हैं, अगर तीसरा विश्व युद्ध हुआ तो चौथा विश्व युद्ध आदिमानव द्वारा लाठी और डंडे से जाएगा।’ यानी तीसरे विश्व युद्ध की स्थिति इतनी भयावह होगी कि संपूर्ण मानव सभ्यता का अंत हो जाएगा। प्रतिस्पर्धा के इस दौर में समूचे विश्व के राष्ट्र स्वयं को एक महाशक्ति के रूप में देखना चाहते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें मानवजाति का हनन क्यों न करना पड़े। आज विश्व में सभी देश आधुनिक हथियार निर्माण की होड़ में लग गए हैं। इनमें से कुछ देशों ने जैविक हथियारों को भी प्रयोग में लाना शुरू कर दिया है, जिससे मानव जाति के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। वर्तमान समय में जैविक हथियारों के प्रयोग से जैविक आतंकवाद पनपता प्रतीत हो रहा है। आज दुनिया भर के लगभग डेढ़ सौ से ज्यादा देश कोविड-19 जैसी महामारी से जूझ रहे हैं। क्या इसे एक जैविक हथियार के रूप में देखा जा सकता है? अगर सुर्खियों की मानें तो इसके जवाब के रूप में हां की छवि थोड़ी धुंधली-सी दिख रही है, लेकिन इसमें थोड़ी-सी भी सच्चाई है, तो आज पूरे विश्व को चाहिए कि जैविक हथियारों के निषेध के लिए कठोर कदम उठाए जाएं और आपसी सौहार्द की भावना से ओत-प्रोत होकर मानवजाति के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करें।
-भास्कर कुमार, उन्नाव

Next Stories
1 चौपाल: देर है, अंधेर नहीं
2 चौपाल: सतर्कता की जरूरत
3 चौपाल: गरीब और रोटी
ये पढ़ा क्या?
X