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चौपालः मानवीय तकाजा

बढ़ते संक्रमण और विदेशों में इसके दुष्प्रभाव को देखते हुए सेनेटाइजर और मास्क निर्माताओं को चाहिए कि कम से कम इस वैश्विक महामारी के समय लागत मूल्य पर सेनेटाइजर और मास्क उपलब्ध कराएं।

Author Published on: March 27, 2020 12:59 AM
कोरोना ने देश की अर्थव्यवस्था तो उथल-पुथल की ही है।

कोरोना से बचाव का मुख्य उपाय सेनेटाइजर और मास्क हैं। बढ़ते संक्रमण और विदेशों में इसके दुष्प्रभाव को देखते हुए सेनेटाइजर और मास्क निर्माताओं को चाहिए कि कम से कम इस वैश्विक महामारी के समय लागत मूल्य पर सेनेटाइजर और मास्क उपलब्ध कराएं। चिकित्सा जगत में कितने गुना मुनाफा रहता है, यह सभी जानते हैं, पर यह समय आपातकालीन सेवाओं का है, अगर ऐसे समय में देश की मेडिकल कंपनियां और व्यापारी मनमाने भाव पर सेनेटाइजर बेचेंगे, तो इसे अमानवीय ही कहा जाएगा। सरकार इस संबंध में मेडिकल कंपनियों और व्यापारी संस्थाओं को आदेश जारी करे।
-मंगलेश सोनी, मनावर, धार, मध्यप्रदेश

प्रदूषण की मार
प्रदूषण हाल के वर्षों में एक बहुत बड़ा खतरा बन कर हमारे बीच उभरा है। यह कोई एक-दो वर्षों का नतीजा नहीं, बल्कि कई वर्षों से हम अपने पर्यावरण का लगातार दोहन करते आए हैं। आज पूरी दुनिया दूषित हवा में सांस ले रही है। भारत में यह स्थिति भयानक स्तर पर मौजूद है। शायद ही कोई ऐसा दिन हो जिसमें एक्यूआई सामान्य रहा हो। राजधानी दिल्ली जैसे महानगरों के हालात तो और भी भयावह हैं। हम जिस वायु में सांस ले रहे हैं या फिर जिस पानी को हम शुद्ध समझ कर पी रहे हैं, कोई भी हमारे शरीर के लिए सुरक्षित नहीं है। आज लगभग सभी घरों में पानी के फिल्टर लगे या हवा साफ करने के लिए एयर पयूरिफायर टंगे हैं। यह समय को बहुत गंभीरता से लेने का वक्त है। हम दिल्ली का हाल दीवाली के समय देख ही सकते हैं। हालात ऐसे हो जाते हैं कि यातायात रोकना पड़ता है। अब कोई किसान भी पराली नहीं जला रहा, फिर भी प्रदूषण का स्तर उतना ही है। हमारे देश में जब पानी सिर के ऊपर चला जाता है, तब हम सबकी आंखे खुलती है।

प्रदूषण का यह स्तर प्रति वर्ष बढ़ता जा रहा है। दुनिया भर के वैज्ञानिक हमें सचेत करते आए हैं, लेकिन अभी तक किसी देश ने प्रदूषण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाया है। भारत में प्रदूषण से लोगों की आयु कम होती जा रही है। लेकिन हमारी सरकारें इसको नजरअंदाज करती आई हैं। हमें एक-दूसरे देश के सहारे पर रहने से अच्छा है खुद ही अपने देश को सुरक्षित बनाएं।

प्रदूषण की समस्या इतनी व्यपाक हो चुकी है कि इससे लड़ना अब कोई आसान काम नहीं है। हम सबको इसे लेकर योजना बनाने की सख्त जरूरत है। यह काम बिना सरकार और प्रशासन के नहीं हो सकता।
-आशीष, रामलाल आनंद कॉलेज (डीयू)

जल ही जीवन
जल मनुष्य का एक अनिवार्य तत्व और मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए यह सभी प्राकृतिक संसाधनों में सबसे मूल्यवान भी है। असंतुलित औद्योगीकरण, जंगलों के विनाश ने पृथ्वी की सतह पर उपलब्ध जल को इतना नुकसान पहुंचाया है कि प्रकृति उसकी भरपाई नहीं कर सकती। अगला युद्ध पानी को लेकर होगा या परमाणु क्षमता को लेकर, यह भले ही बहस का विषय हो, मगर तेजी से बढ़ती आबादी को पानी की जरूरत तो पड़ेगी। इस धरती पर काफी पानी खारा है। किसी समय बिना किसी मूल्य के पानी हमारे जीवन में उपलब्ध था और अब यह समय आ चुका है कि हम पानी खरीदने को मजबूर हैं। लाखों लोगों को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है। पानी अनमोल है, इसके बावजूद हम इसे संभालने-सहेजने के लिए गंभीर नहीं हैं। पानी का उपयोग सोच-समझ कर किया जाए, इसका संग्रह किया जाए। हर वर्ष विश्व जल दिवस मनाने से कुछ नहीं होने वाला। जरूरत है, ठोस और दीर्घकालिक नीति बने, हर इंसान पानी के महत्त्व को समझे। अभ्ब भी समय है, जब हम चेत जाएं।
’साजिद अली, चंदन नगर, इंदौर

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