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चौपालः कितने तैयार हैं हम

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लोगों में व्यक्तिगत साफ-सफाई की आदतें बेहतर हैं। हाथ धोना या नहाने-धोने की आदतें कोरोना संक्रमण से बचाने में काफी मददगार साबित हो सकती हैं।

यमुना का पानी साठ प्रतिशत तक साफ हो गया है।

अगर कोरोना वायरस चीन की तरह भारत में फैल गया तो क्या हम उससे निपट पाने में सक्षम हैं? यह बात सच है कि अगर हम देश की राजधानी दिल्ली और कुछ चुनिंदा महानगरों को छोड़ दें, तो हमारे यहां सरकारी अस्पतालों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। चीन जैसा विकसित देश कोरोना महामारी फैलने के बाद लाचार हो गया। हालांकि जिस तरीके से भारत में सरकार और गैर सरकारी संगठनों ने इस संक्रमण को लेकर जागरूकता दिखाई है, उससे लगता है कि हम कोरोना वायरस के हमले से निपटने के लिए तैयार हो रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लोगों में व्यक्तिगत साफ-सफाई की आदतें बेहतर हैं। हाथ धोना या नहाने-धोने की आदतें कोरोना संक्रमण से बचाने में काफी मददगार साबित हो सकती हैं। निसंदेह कोरोना वायरस खतरनाक है। चिंताजनक बात यह है कि अब तक इसका कोई टीका या दवा विकसित नहीं हो पाई है। इसलिए सरकार और लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
-रितेश कुमार उपाध्याय, संतकबीर नगर

तत्परता जरूरी
दुनिया भर में कोरोना वायरस ने तहलका मचा रखा है। इस संक्रमण से भारत में पहली मौत की पुष्टि कर्नाटक से हुई है। यह संक्रमण देश के कई हिस्सों में फैल गया है। इसकी भयावहता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक महामारी करार दे दिया है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस को लेकर दुनिया को पहले ही आगाह कर दिया था। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि इसके प्रति गंभीरता और संवेदनशीलता का अभाव देखा गया। अगर इसे गंभीरता से लिया गया होता तो इतने व्यापक स्तर पर फैल नहीं पाता। लेकिन यह संवेदनशील वायरस छोटी-सी चूक से भी फैलने में सक्षम है। अब भी वक्त है दुनिया के देशों को सतर्क हो जाना चाहिए, जिससे कि संक्रमण व्यापक स्तर पर अपने पैर न पसार पाए। इस संवेदनशील वायरस के संक्रमण से निजात पाने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जाने निहायत जरूरी हैं।
-अली खान, जैसलमेर

हमें तो लूट लिया!
बुरे वक्त के लिए बचत का कुछ हिस्सा गुल्लकों में रखने वालों के लिए बैंकों के बढ़ते दायरों में सुकून की रोशनी दिखाई दी थी। सरकार के कड़े नियमों और निगरानी में बैंकों में रखे धन की सुरक्षा पर देश के लोगों को पूरा भरोसा था। लेकिन पिछले कुछ सालों में हम जिंदगी की जमा पूंजी बैंकों के हवाले कर बेफिक्र हो गए। और उस वक्त होश उड़ गए जब मालूम चला कि हमें तो बड़े कर्जदारों ने लूट लिया। लगातार होते घोटालों ने न केवल बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, बल्कि जमाकर्ताओं के भरोसे को तोड़ कर रख दिया। लोगों के पसीने की कमाई पर बढ़ती असुरक्षा से बैंकों की साख पर सवाल खड़े हुए हैं। धोखाघड़ी की बढ़ती घटनाओं ने सरकारी तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया। गरीबों को न केवल खोया भरोसा, बल्कि खोई रकम वापस करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
-एमके मिश्रा, मां आनंदमयीनगर, रातू

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