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अवसरवादी सिद्धांत

पहले राजनीति सिद्धांतों पर की जाती थी, लेकिन आज राजनीति में सिद्धांत के लिए कोई स्थान नहीं रह गया है। सिर्फ सत्ता प्राप्ति राजनीति का एकमात्र उद्देश्य बन चुका है। बिहार में अवसरवादी राजनीति इसकी पराकाष्ठा और जनता के साथ धोखा है। बिहार की जनता ने एनडीए गठबंधन को जनमत दिया था, लेकिन आज भाजपा […]

अवसरवादी सिद्धांत
JDU-RJD Government: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव। (पीटीआई फोटो)

पहले राजनीति सिद्धांतों पर की जाती थी, लेकिन आज राजनीति में सिद्धांत के लिए कोई स्थान नहीं रह गया है। सिर्फ सत्ता प्राप्ति राजनीति का एकमात्र उद्देश्य बन चुका है। बिहार में अवसरवादी राजनीति इसकी पराकाष्ठा और जनता के साथ धोखा है। बिहार की जनता ने एनडीए गठबंधन को जनमत दिया था, लेकिन आज भाजपा और जद (एकी) की राहें अलग हो गई हैं।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजद, कांग्रेस और वामदलों के सहयोग से नई पारी की शुरुआत की है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पूर्व भी नीतीश कुमार ने अवसरवादी राजनीति का उदाहरण पेश करते हुए भाजपा से अलग होकर राजद और कांग्रेस के साथ सरकार बनाई थी। सत्ता की चाहत में धुर विरोधी पार्टी भी हाथ मिला लेती है। गठबंधन बदलने से सरकार की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं और नौकरशाहों की कार्य प्रणाली में भी बदलाव आ जाता है। अवसरवादी राजनीति लोकतंत्र के लिए नुकसानदेह है।

  • हिमांशु शेखर, गया

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