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चौपालः शिक्षा की चुनौतियां

हाल में, दिल्ली सरकार ने बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आरंभ की, जिसके लिए सर्वप्रथम सॉफ्टवेयर पर विद्यार्थियों को पंजीकरण करना पड़ता है। दिल्ली के बारहवीं कक्षा में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या लगभग 1.2 लाख है, जबकि अभी तक मात्र नौ हजार विद्यार्थी पंजीकृत हो पाए हैं।

स्कूल में घूमते बच्चे। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शिक्षा प्रत्येक देश की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक विकास की बुनियाद है, इसलिए आज दुनिया के अधिकांश राष्ट्र गुणवत्ता युक्त शिक्षा मुफ्त प्रदान कर रहे हैं। देश के विद्यालयों से निकलने वाले बच्चे ही राष्ट्र निर्माण में सहभागिता निभाते हैं, ऐसा आपने प्राय: राजनेताओं, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवकों के वक्तव्यों में अक्सर सुना होगा। भारत के नागरिकों को संविधान अनेक अधिकार प्रदान करता है, जो लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए संविधान निर्माताओं द्वारा प्रदान किए गए। बच्चों को ‘शिक्षा का अधिकार’ अधिनियम मौलिक अधिकारों के रूप में संविधान में वर्णित है। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश, सभी बाध्य हैं। आज देश जब विश्वव्यापी महामारी के खिलाफ जंग लड़ रहा है, इस बीच हमारे देश के कर्णधार शिक्षा से अलगाव महसूस कर रहे थे। बच्चों के लिए निरंतर शैक्षिक कक्षाएं आरंभ करने का माध्यम आज पुन: प्रौद्योगिकी ही बना है। सूचना प्रौद्योगिकी के सहयोग से आज जूम मीटिंग क्लाउड, कैरियर लांचर, गूगल क्लासरूम जैसे अनेक शैक्षिक सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को पूर्णबंदी के इस दौर में भी जारी रखा जा सकता है।

हाल में, दिल्ली सरकार ने बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं आरंभ की, जिसके लिए सर्वप्रथम सॉफ्टवेयर पर विद्यार्थियों को पंजीकरण करना पड़ता है। दिल्ली के बारहवीं कक्षा में नामांकित विद्यार्थियों की संख्या लगभग 1.2 लाख है, जबकि अभी तक मात्र नौ हजार विद्यार्थी पंजीकृत हो पाए हैं। इस सर्वेक्षण के आधार पर हजारों विद्यार्थी इस ऑनलाइन शिक्षण प्रक्रिया से वंचित हैं, इसकी अहम वजह आर्थिक असमानता है, क्योंकि सरकारी विद्यालयों में ज्यादातर गरीब तबकों के बच्चे दाखिला लेते हैं। इन तबकों के लोग साधन संपन्न न होने के कारण अपने बच्चों को कंप्यूटर, मोबाइल, इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराने में अक्षम हैं। जबकि निजी विद्यालयों में अधिकतर संभ्रांत वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं, जो सभी डिजिटल सुविधाओं से संपन्न होते हैं। इसलिए सरकारी विद्यालयों को आॅनलाइन शिक्षा प्रदान करना एक अहम चुनौती है। आज सभी बच्चों को डिजिटल शिक्षा माध्यम से जोड़ने के लिए सरकारों को स्वयं सरकारी विद्यालयों के इन बच्चों के लिए डिजिटल उपकरण प्रदान करने चाहिए, जिससे शिक्षा में गरीब-अमीर की खाई न बन पाए और सभी बच्चे समान रूप से शिक्षण प्रक्रिया में जुड़े रहें, जब सरकारें सभी बच्चों को समान रूप से शिक्षा प्रदान करेंगी, तभी ‘सर्व शिक्षा अभियान’ और ‘सभी के लिए शिक्षा’ के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है, इसके लिए आज सरकारों, अभिभावकों, शिक्षकों, मीडिया क्षेत्रों, बुद्धिजीवियों, गैर-सरकारी संगठनों की प्रतिबद्धता आवश्यक है।
-अजीत यादव, रोहिणी, दिल्ली

कोरोना से जंग
भारत इस समय वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है, पर कुछ लोग सोशल मीडिया के जरिए अफवाह फैलाने में लगे हुए हैं और धर्म विशेष के मुद्दों को लेकर भड़काऊ बातें लिख रहे हैं। इस समय इन सबसे दूर रह कर सभी लोगों को एकजुट होकर देशहित में काम करना है। ऐसा कोई काम नहीं करना है, जिससे देशवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़े। सोशल मीडिया हमें अपनी बात कहने की आजादी देता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम गलत बयानबाजी करके नफरत का माहौल पैदा करें। प्रधानमंत्री ने सभी देशवासियों से हाथ जोड़ कर अपील की है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए देशहित में कार्य करें। बिना काम के बाहर न निकलें, कोरोना के खिलाफ मुहिम में भागीदार बन कर एक-दूसरे की मदद करें और लोगों को जागरूक करें। किसी बहकावे में न आकर अपने विवेक से काम लें। जब हम जागरूक होंगे और दूसरों को भी जागरूक करेंगे, अफवाहों से दूर रहेंगे और सामाजिक दूरी का पालन करेंगे, तो जरूर इस महामारी से बहुत जल्द पार पा लेंगे।
-योगेंद्र गौतम, ललऊ खेड़ा बाजार, उन्नाव

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