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हंगामे के बजाय

लोकसभा में इन दिनों हंगामे के चलते कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पास नहीं हो पा रहे हैं। हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही को स्थगित तक करना पड़ा। सांसद कागज फाड़कर लोकसभा अध्यक्ष की ओर फेंक रहे थे, कागज के जहाज बनाकर उड़ाए जा रहे थे।

लोकसभा (पीटीआई फोटो)

लोकसभा में इन दिनों हंगामे के चलते कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पास नहीं हो पा रहे हैं। हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही को स्थगित तक करना पड़ा। सांसद कागज फाड़कर लोकसभा अध्यक्ष की ओर फेंक रहे थे, कागज के जहाज बनाकर उड़ाए जा रहे थे। सदन की कार्यवाही में बाधा डालने और तमाशा करने के कारण स्पीकर को कई दलों के सांसदों को सदन से निलंबित भी करना पड़ा। सदन में हंगामा करना या कार्यवाही में बाधा डालना यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। संसद एक विधायी संस्था है जहां जनहित संबंधी विधान बनाए जाते हैं। यदि सदन में इस तरह का तमाशा होगा तो न केवल महत्त्वपूर्ण कार्य छूट जायेंगे बल्कि जनता पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सांसदों को सदन की मर्यादा में रह अपनी बात कहनी चाहिए न कि हंगामा करके।
’शरद कुमार बरनी, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश

घटता एनपीए
रिजर्व बैंक द्वारा जारी हालिया वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का फंसा हुआ कर्ज अथवा गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) मार्च 2018 में जहां 15.2 प्रतिशत के करीब पहुंच गया था, वहीं सितंबर 2018 में यह घट कर 14.8 प्रतिशत रह गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिदृश्य को देखते हुए बैंकों का एनपीए मार्च 2019 तक कम होकर 10.3 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है। वस्तुत: पिछले वर्ष करीब 80 हजार करोड़ रुपए के कर्ज की वसूली हुई है और इस साल एक लाख करोड़ रुपए की वसूली अनुमानित है। बैंक कर्जों की बढ़ती वसूली से भारी-भरकम एनपीए के बोझ से कराह रहे बैंकों को निश्चित ही राहत मिलेगी। इससे कर्ज प्रवाह बढ़ेगा। बैंक अपने ग्राहकों को सरलता से अधिक कर्ज और जमा पर अधिक ब्याज दे सकेंगे।
’हेमंत कुमार, ग्राम/पोस्ट-गोराडीह, भागलपुर

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