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गरीबी के खिलाफ

दुनिया अब तक यही समझती आई है कि भारत गरीबों का देश है। यहां के लोग गरीबी से तंग आकर दूसरे देशों में अपना बसेरा तलाशने की कोशिश करते हैं। कम तनख्वाह में भी काम करने की वजह इनके देश में मौजूद गरीबी है। लेकिन वास्तव में अब ऐसा नहीं है। गरीबी के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2005-06 में जो गरीबी 54.1 फीसद थी, वह अब घटकर 27.5 फीसद रह गई है।

Author January 4, 2019 5:00 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (फाइल फोटो)

दुनिया अब तक यही समझती आई है कि भारत गरीबों का देश है। यहां के लोग गरीबी से तंग आकर दूसरे देशों में अपना बसेरा तलाशने की कोशिश करते हैं। कम तनख्वाह में भी काम करने की वजह इनके देश में मौजूद गरीबी है। लेकिन वास्तव में अब ऐसा नहीं है। गरीबी के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीशिएटिव की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2005-06 में जो गरीबी 54.1 फीसद थी, वह अब घटकर 27.5 फीसद रह गई है। इस रिपोर्ट की विशेषता यह है कि इसमें लोगों की आय के साथ उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और कुपोषण को भी ध्यान में रख कर तैयार किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार और झारखंड का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है।

इसमें दो राय नहीं कि आधी से ज्यादा आबादी को गरीबी से उबारना हमारे लिए बेहद उत्साहजनक और यह विश्वास दिलाने वाला है कि हमारी मेहनत सही दिशा में जा रही है। लेकिन सवाल है हमारे जो राज्य पीछे रह गए हैं उन्हें आगे कैसे लाया जाए; कैसे उनके शिक्षा और स्वास्थ्य के स्तर को और आधिक बढ़ाया जा सकता है! इसके लिए सबसे पहले जरूरत है कि उन इलाकों में स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों की संख्या बढ़ाई जाए। हम अक्सर देखते हैं दूरदराज के इलाकों में होनहार बच्चे सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़ देते हैं कि उनके आसपास बड़े संस्थान ही नहीं मौजूद होते हैं और शहर का खर्च वे उठा नहीं सकते। दूसरा, ऐसे इलाकों में जागरूकता के अभाव में लोग कई तरह की बीमारियों के शिकार हो जाते हैं और गांव के अल्पशिक्षित डॉक्टरों के पास जाकर बहुत सारा पैसा दवाइयों पर ही बर्बाद कर देते हैं। जब लोग स्वस्थ और जागरूक रहेंगे तो ज्यादा उम्र तक काम करके अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकेंगे। इस लिहाज से सरकार को अपनी योजनाएं जिला और ब्लॉक स्तर पर कड़ाई से लागू करने की जरूरत है ताकि देशवासियों को उनका पूरा फायदा मिल सके। यातायात की बेहतर सुविधाएं देकर शहरों और गांवों के बीच की दूरी को कम किया जा सकता है। अगर हम ऐसा करने में सफल रहे तो निश्चित ही सभी देशवासियों को समानता और समावेशी विकास के लाभ मुहैया कराने के साथ ही बेहतर मानव संसाधन को बढ़ावा दे सकेंगे।
’रोहित यादव, महर्षि दयानंद विवि, रोहतक

हमारा दायित्व
जरूरी केवल यह नहीं कि बेहतर कल के प्रति भरोसा कायम रखा जाए, बल्कि यह भी है कि बतौर एक नागरिक अपने-अपने हिस्से के दायित्व निर्वहन की संभावनाएं टटोली जाएं। यह न केवल हमारे राष्ट्रीय जीवन में आवश्यक सकारात्मकता का संचार करेगा बल्कि वह जरूरी प्रेरणा भी देगा जो स्वयं के साथ ही दूसरों के जीवन में बदलाव लाने में सहायक बनती है। नया वर्ष हमें कुछ नया करने और सोचने का अवसर उपलब्ध कराता है। इससे अच्छा और कुछ नहीं कि इस अवसर का उपयोग खुद को और दूसरों को प्रेरित करने के लिए किया जाए। निस्संदेह यह भाव ही बहुत कुछ बदल देगा कि हम सबको अपने देश और अपनों के लिए कुछ बेहतर करना है।
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

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