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विकास से वंचित

नीति आयोग ने देश के पिछड़े जिलों की ताजा रैंकिंग जारी की है। इस रैंकिंग के अनुसार तमिलनाडु के विरुदनगर, ओड़ीशा के नौपदा और उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर ने विकास के मामले में संतोषजनक प्रदर्शन किया है। यह निराशाजनक है कि कुछ राज्य पिछड़े जिलों को विकसित करने की योजना का लाभ उठाने के मामले में तत्पर नहीं दिख रहे हैं।

Author January 2, 2019 4:24 AM
प्रतीकात्मक चित्र।

नीति आयोग ने देश के पिछड़े जिलों की ताजा रैंकिंग जारी की है। इस रैंकिंग के अनुसार तमिलनाडु के विरुदनगर, ओड़ीशा के नौपदा और उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थ नगर ने विकास के मामले में संतोषजनक प्रदर्शन किया है। यह निराशाजनक है कि कुछ राज्य पिछड़े जिलों को विकसित करने की योजना का लाभ उठाने के मामले में तत्पर नहीं दिख रहे हैं। आज जब संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य पूरे करने की चुनौती है तब यह अनिवार्य है कि देश के विकास से वंचित इलाकों को विकसित करने की मुहिम शुरू की जाए। इस मामले में उत्तर भारत का प्रदर्शन निराशाजनक है। अपने देश की एक बड़ी समस्या यह है कि राजनीतिक दलों के हर तरह के व्यवहार को राजनीति कह दिया जाता है चाहे वह कितना ही जनविरोधी क्यों न हो? इससे राजनीति और कुराजनीति का भेद ही खत्म होता है।
’चांद मोहम्मद, आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

हार की खीझ
भारतीय राजनीति का असर अब पड़ोसी देशों पर भी पड़ने लगा है, खासकर विपक्ष की। हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में हाल ही में संपन्न हुए चुनावों में वहां की जनता ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को तीसरी बार प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में बिठाया है। जहां 298 सीटों वाली बांग्लादेशी संसद में सत्ता पक्ष को 287 सीटें मिलीं वहीं विपक्ष को कुल सात सीटें। अब वहां विपक्ष अपनी हार को सहजता से स्वीकार करने के बजाय सरकार पर आरोप लगा रहा है कि उसने चुनाव आयोग की मदद से हेराफेरी की है।

भारत में भी जब विपक्षी दल हार जाते हैं तो कहते हैं कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के साथ छेड़छाड़ हुई है, चाहे पहले वे खुद उसी ईवीएम से मिले वोटों से सत्ता सुख भोग कर आए हों। वे चुनाव आयोग के खिलाफ मुखर होने में नहीं कतराते लेकिन जब दुबारा किसी राज्य में ईवीएम से जीत जाते हैं तो उन्हें कोई गुरेज नहीं होता और कहते हैं कि जनता हमारे साथ थी! इसी तरह का दोगला रवैया अब बांग्लादेश भी पहुंच गया है। राजनीतिक दलों को ऐसी स्थिति में आत्ममंथन कर हार के कारणों की तलाश करनी चाहिए। इससे उन्हें भविष्य में ज्यादा फायदा होगा।
’मनीष पांडेय, दिलशाद गार्डन, दिल्ली

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