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खटता बचपन

भारत में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है लेकिन विडंबना है कि फिर भी उनसे मजदूरी कराई जाती है। पढ़ने और खेलने-कूदने की उम्र में मजदूरी में खटने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कहने को हमारी सरकारें बाल मजदूरी खत्म करने के लिए बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करती हैं लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहता है।

Author January 3, 2019 4:14 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है। (Image Source: YouTube/low agers productions)

भारत में बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है लेकिन विडंबना है कि फिर भी उनसे मजदूरी कराई जाती है। पढ़ने और खेलने-कूदने की उम्र में मजदूरी में खटने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कहने को हमारी सरकारें बाल मजदूरी खत्म करने के लिए बड़े-बड़े वादे और घोषणाएं करती हैं लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहता है। इतनी जागरूकता के बाद भी भारत में बाल मजदूरी का खात्मा नहीं हो पाया है। गरीब बच्चे इसका सबसे अधिक शिकार हो रहे हैं। बच्चियों तक को स्कूल के बजाय घरों में काम करने के लिए भेज दिया जाता है। बाल मजदूरी बच्चों के शारीरिक, बौद्धिक और सामाजिक हितों को प्रभावित करती है। इससे वे मानसिक रूप से अस्वस्थ रहते हैं और उनका शारीरिक विकास भी अवरुद्ध हो जाता है। बाल मजदूरी की समस्या बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित करती है जो संविधान-विरुद्ध होने के साथ ही मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघन है।

’सुशील वर्मा, गोरखपुर विश्वविद्यालय

बेटियों की बाजी
भारत में अब बेटों से ज्यादा बेटियां बाजी मार रही हैं। प्रधानमंत्री ने भी ‘मन की बात’ में ऐसी ही दो बेटियों का जिक्र किया। इनमें एक दक्षिण कश्मीर की बारह साल की हनाया निसार है। उसने दक्षिण कोरिया में अंतरराष्ट्रीय कराटे चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर देश का नाम रोशन किया है। दूसरी हरियाणा की सोलह वर्षीय रजनी है जिसने जूनियर मुक्केबाजी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत कर देश को गौरवान्वित किया है। रजनी बेहद साधारण परिवार से है और उसके पिता लस्सी बेच कर गुजारा करते हैं। हमें इन बेटियों पर गर्व है। इन्होंने साबित कर दिया है कि देश की बेटियों को बस एक उड़ान की जरूरत है।
’विविधा, दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म, दिल्ली

ऐसी हाजिरी
बच्चों में देशभक्ति की भावना होना बहुत जरूरी है। देश के प्रति वफादारी और देशभक्ति को बढ़ावा देने के लिए गुजरात सरकार ने स्कूलों के लिए नया निर्देश जारी कर दिया है जिसके तहत अब बच्चों को अपनी हाजिरी लगवाने के लिए ‘जय हिंद’ या ‘जय भारत’ बोलना होगा। पिछले कुछ समय से देश के कई छात्र आतंकवादी संगठनों से जुड़े हैं। आतंकवादी छात्रों को बरगला कर उन्हें दहशतगर्द बनने के लिए उकसाते हैं। लेकिन जब बचपन से ही बच्चे हाजिरी के समय ‘जय हिंद’ और ‘जय भारत’ कहेंगे तो उनमें यह भावना जरूर पैदा होगी कि वे हिंदू या मुसलिम होने से पहले एक भारतीय हैं। गुजरात सरकार का बच्चों में देशप्रेम बढ़ाने का यह अच्छा प्रयास है।
’निशांत रावत, आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

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