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दावे-प्रतिदावे

प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि राम मंदिर बनाने के लिए सरकार का अध्यादेश लाने का कोई इरादा नहीं है। इसके लिए पहले सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी होना जरूरी है। उसके बाद सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राम मंदिर को लेकर उठने वाली चर्चा थम जानी चाहिए।

Author January 4, 2019 5:05 AM
प्रतीकात्मक फोटो (फाइल)

प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि राम मंदिर बनाने के लिए सरकार का अध्यादेश लाने का कोई इरादा नहीं है। इसके लिए पहले सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी होना जरूरी है। उसके बाद सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद राम मंदिर को लेकर उठने वाली चर्चा थम जानी चाहिए। नए साल के पहले दिन दिए अपने इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कई अन्य मुद्दों पर सरकार का पक्ष साफ कर आम चुनाव से पहले विपक्ष के हमलों की धार कुंद करने की कोशिश की है। लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माने जा रहे हैं कुछ राज्यों के हालिया चुनाव में हार के बाद भाजपा 2019 की चुनौतियों का आकलन कर रही है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री ने मुख्य विपक्षी कांग्रेस पर निशाना साधा। इस दौरान वे अपनी सरकार की उपलब्धियों से ज्यादा विवादित मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखते नजर आए। इसी बीच पाकिस्तान को लेकर प्रधानमंत्री का बयान आया जो दोनों देशों के बीच तनातनी पर भारत का रुख स्पष्ट करने वाला था। प्रधानमंत्री ने फिर साफ किया कि पाकिस्तान को सुधारने में अभी काफी समय लगेगा, वह केवल एक लड़ाई से सुधर नहीं सकता। यह संदेश भारत की ओर से पाकिस्तान तक सख्ती से पहुंचाया जाना चाहिए। इस इंटरव्यू के बाद पक्ष और विपक्ष में तलवारें तन गई हैं। विपक्ष प्रधानमंत्री के दावों को नकार रहा है या उसमें कमियां बता रहा है। जनता इन दावों और प्रतिदावों का सच जानना चाहती है।
’अमन सिंह, प्रेमनगर, बरेली, उत्तर प्रदेश

पर्वतों का संरक्षण
किसी देश या स्थान विशेष को रहने योग्य बनाने में पर्वतों की विशेष भूमिका होती है। वे क्षेत्र विशेष की जलवायु का निर्धारण करने के साथ-साथ जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में भी विशेष योगदान करते हैं। वे विभिन्न प्रकार के खनिजों से संपन्न होते हैं। यही कारण है कि मनुष्य लगातार पर्वतों को नुकसान पहुंचा रहा है। वृक्षों की कटाई, खनिज पदार्थों की मनमानी निकासी, बिना दूरदर्शिता के सड़क और रेल पथ के निर्माण से पर्वतों को लगातार खत्म किया जा रहा है। अरावली पर्वत के बारे में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई सख्त टिप्पणी इस बात का प्रमाण है कि किस तरह मानवीय गतिविधियां पर्वतों को नष्ट कर रही हैं। पर्वतों से छेड़छाड़ के कारण भूस्खलन की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। केदारनाथ की भीषण त्रासदी पर्वतों से छेड़छाड़ का ही परिणाम थी। विश्व की करीब तेरह प्रतिशत जनसंख्या पर्वतीय क्षेत्रों में निवास करती है। इसमें ज्यादातर आदिम जनजातियां हैं जिनका अस्तिव पर्वतों पर ही निर्भर करता है। मानव सभ्यता की अमूल्य धरोहरों का अस्तिव बचाने के लिए भी पर्वतों का रक्षण आवश्यक है। पर्वतों को बचाने के लिए सबसे पहले सरकार को विशेष नीति बना कर पर्वतीय क्षेत्रों में इंसानी गतिविधियों के लिए मानक तय करने होंगे और अवैध क्रियाकलापों पर सख्ती से रोक लगानी होगी।
’ऋषभ देव पांडेय, सूरजपुर, छत्तीसगढ़

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