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चौपालः मदद की दरकार

सरकार दावा कर रही है कि इस पूर्णबंदी में भी वह मनरेगा द्वारा मजदूरों को काम दे रही है। किसान सम्मान का पैसा दे रही है, राशन दे रही है। लेकिन इस वक्त टुकड़े-टुकड़े में मदद करने के बजाय समग्रता में मदद की जरूरत है।

सरकार दावा कर रही है कि इस पूर्णबंदी में भी वह मनरेगा द्वारा मजदूरों को काम दे रही है।

वैश्विक महामारी ने देश के मध्य एवं निम्न वर्ग के आर्थिक ढांचे को ध्वस्त कर दिया है। ऐसे में जरूरी हो गया है कि सरकार एक लक्षित समूह के बजाय देश के सभी नागरिकों या ज्यादा से ज्यादा नागरिकों तक राहत पहुंचाने की नीति पर काम करे। इस समय मजदूर-कामगार, खेतिहर मजदूर, किसान, छोटे कारोबारी, आदिवासी, बेघर, बुजुर्ग आदि को सबसे ज्यादा राहत की जरूरत है। पूर्णबंदी की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले यही लोग हैं। दिहाड़ी मजदूरों का काम बंद है, किसान कई तरह के संकट झेल रहे हैं। पहले ही पूर्णबंदी की वजह से ज्यादातर किसान फसल नहीं काट पाए हैं, ऊपर से बेमौसम बारिश ने तबाह कर रखा है। स्वरोजगार करने वालों का धंधा चौपट है। इसलिए सरकार को चाहिए कि इन लोगों के लिए नकद राशि का इंतजाम करे।

सरकार दावा कर रही है कि इस पूर्णबंदी में भी वह मनरेगा द्वारा मजदूरों को काम दे रही है। किसान सम्मान का पैसा दे रही है, राशन दे रही है। लेकिन इस वक्त टुकड़े-टुकड़े में मदद करने के बजाय समग्रता में मदद की जरूरत है। देखा जाए तो सरकार अगर अस्सी फीसद लोगों की प्रति व्यक्ति सात हजार रुपए भी मदद करे, तो सवा चार लाख करोड़ रुपए से कुछ ज्यादा खर्च आएगा। मतलब कि देश के अनुमानित जीडीपी का लगभग ढाई प्रतिशत। यह सरकार के लिए कोई बड़ी रकम नहीं है। जरूरत है, सरकार की इच्छा शक्ति की। हाशिए पर जीवनयापन करने वाली आबादी के आर्थिक सहायता लिए सरकार को सोचना होगा।
-जयप्रकाश नवीन, नालंदा (बिहार)

इलाज की उम्मीद
दुनिया भर में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या और मौतों का आकड़ा बढ़ता जा रहा हैं। वैज्ञानिक इसकी दवा खोजने में लगे में हैं, लेकिन अभी तक कोई पुख्ता इलाज हाथ नहीं लगा है। हालांकि भारत में कोरोना विषाणु के लिए प्लाज्मा से उपचार कारगर साबित होने का दावा किया जा रहा है। इस विधि से दो मरीजों की हालत में सुधार की बात सामने आई है। ऐसे में कोरोना को परास्त कर ठीक हुए मरीजों से प्लाज्मा दान करने की अपील की जा रही है। अच्छी बात यह है कि जो लोग कोरोना को हरा चुके हैं, वे खुद सामने आकर अपना प्लाज्मा दे रहे हैं। अगर प्लाज्मा उपचार कामयाब हो जाता है तो यकीनन बहुत जल्द कोरोना पर विजय हासिल की जा सकती हैं।

कोरोना को हराने के लिए हर देशवासी का फर्ज बनता है कि वह सुरक्षित दूरी और साफ-सफाई का खयाल रखे, मास्क लगाए और सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करे। अगर प्लाज्मा उपचार कारगर साबित होती है, तो भारत विश्व के सामने एक नायाब उदाहरण पेश करेगा। हालांकि प्लाज्मा उपचार कितना कारगर और कामयाब साबित होगा, यह तो आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होगा।
-गौतम एस.आर, खंडवा (मप्र)

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