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चौपाल: जंगल की आग व विचित्र दृष्टि

विज्ञान ऐसी तकनीकी विकसित नहीं कर पाया है जो जंगलों में लगी भीषण आग पर काबू पा सके।

इससे पहले ऐसी भी बात सामने आ चुकी है कि लोगों को कपड़ों से पहचाना जा सकता है।

आस्ट्रेलिया सहित कई देशों के जंगलों में लगी आग सिरदर्द बनी हुई है। यह भीषण आग पेड़ पौधों, वनस्पतियों के साथ-साथ वन्यजीव जंतु के जीवन को लील चुकी है। लाख प्रयास के बाद भी आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। यह विडंबना ही कही जाएगी कि एक तरफ विज्ञान के आविष्कार ने ऐसे ऐसे तकनीकी विकास किए हैं और हथियार बनाए हैं कि समूची दुनिया को पल भर में नष्ट कर दें। वहीं विज्ञान ऐसी तकनीकी विकसित नहीं कर पाया है जो जंगलों में लगी भीषण आग पर काबू पा सके! क्या जंगलों में लगी आग नहीं बुझने पर यह नहीं कहा जा सकता है कि विज्ञान व उसकी प्रगति की जगजाहिर पराजय है!

’हेमा हरि उपाध्याय अक्षत, उज्जैन

विचित्र दृष्टि

बड़े मियां तो बड़े मियां, छोटे मियां सुभान अल्लाह। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और मध्यप्रदेश के कद्दावर नेताओं में से एक कैलाश विजयवर्गीय लोगों को उनके खाने के तरीके से बता देते हैं कि वह किस देश से आया है या कहें कि किस देश का है। विजयवर्गीय के घर पर निर्माण कार्य चल रहा था, जिसमें कई मजदूर काम कर रहे थे। उन्हीं में से किसी एक मजदूर के पोहे खाने के तरीके पर विजयवर्गीय ने उसे बांग्लादेशी ठहरा दिया। अजीब है, लगता है भाजपा के नेताओं के पास अलग ही किस्म की दृष्टि है। इससे पहले ऐसी भी बात सामने आ चुकी है कि लोगों को कपड़ों से पहचाना जा सकता है। इस देश के लोकतांत्रिक ढांचे में जीने वाले लोगों के पास कौन-से अधिकार बचे हुए हैं?

’आदेश दुबे, इंदौर, मध्यप्रदेश

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