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चौपाल: जल और कल

भारत में स्थिति अभी भी अत्यंत खराब है। हालांकि भारत विश्व के सबसे आर्द्र देशों में से एक है पर इसमें जल का वितरण समय और स्थान के आधार पर बहुत असमान है।

जीवन के लिए सबसे अहम प्राकृतिक संसाधन जल है।

जीवन के लिए सबसे अहम प्राकृतिक संसाधन जल है। आगामी दशकों में यह विश्व के कई क्षेत्रों में गंभीर अभाव की स्थिति में चला जाएगा। हालांकि जल पृथ्वी में सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है, फिर भी यह समान रूप से वितरित नहीं है। अक्षांश में परिवर्तन, वर्षा के तरीके (पैटर्न), स्थलाकृति आदि इसकी उपलब्धता को प्रभावित करते हैं। जल एक ऐसी संपदा है जिसका किसी तकनीकी प्रक्रिया के माध्यम से, जब जी चाहे तब उत्पादन या संचयन नहीं हो सकता। मूल रूप से पृथ्वी पर कुल मिलाकर अलवण जल और समुद्री जल की मात्रा स्थायी रूप से तय है।

जो अलवण जल हमारे जीवन के लिए इतना जरूरी है, उसकी मात्रा पृथ्वी पर पाए जाने वाले पानी की कुल मात्रा की केवल 2.7 फीसद है। इस दो प्रतिशत का लगभग सारा भाग बर्फ की चोटियों, हिमनदों (ग्लेशियरों) और बादलों के रूप में पाया जाता है। अलवण जल का शेष बचा हुआ थोड़ा-सा भाग झीलों और भूमिगत स्रोतों में सदियों से एकत्रित है। वर्षा का लगभग 85 फीसद जल प्रत्यक्ष रूप से समुद्र में गिरता है और भूमि में कभी नहीं पहुंच पाता है। वर्षा का जो शेष भाग भूमि पर गिरता है, वह झीलों और कुओं को भर देता है और नदियों के प्रवाह को बढ़ाता रहता है। समुद्री जल के प्रत्येक 50,000 ग्राम के सामने सिर्फ एक ग्राम अलवण जल मानव जाति को उपलब्ध है। इस कारण जल एक दुर्लभ और अनमोल संसाधन के रूप में सामने आता है।

भारत में स्थिति अभी भी अत्यंत खराब है। हालांकि भारत विश्व के सबसे आर्द्र देशों में से एक है पर इसमें जल का वितरण समय और स्थान के आधार पर बहुत असमान है। हमारे यहां औसतन 1150 मिलीमीटर वार्षिक वर्षा होती है, जो संसार में किसी भी समान आकार के देश के मुकाबले में सबसे अधिक है। पर इस बड़ी मात्रा की वर्षा का वितरण असमान है। उदाहरण के लिए, एक वर्ष में औसतन वर्षा के दिनों की संख्या केवल 40 है इसलिए वर्ष का शेष लंबा भाग सूखा रहता है। इसके अलावा, जहां उत्तर-पूर्व के कुछ क्षेत्रों में वर्षा तेरह मीटर तक होती है, वहीं राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में 20 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा नहीं होती। इससे स्पष्ट है कि वर्षा के इस असमान वितरण के कारण देश के कई भागों में पानी का भीषण अभाव रहता है। इसके मद्देनजर जहां तक हो सकेहमारे लिए जल का व्यापक संरक्षण बहुत जरूरी है।
रितेश कुमार उपाध्याय, संत कबीर नगर

हिमा की उपलब्धि
डिंग एक्सप्रेस के नाम से मशहूर ‘गोल्डन गर्ल’ हिमा दास ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए स्वर्ण पदकों की बौछार कर दी। उन्होंने पिछले पंद्रह दिनों के भीतर अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में पांच स्वर्ण पदक जीत कर भारत का नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरों में अंकित कर दिया। उन्नीस वर्षीय हिमा इतने कम समय में इतनी सारी उपलब्धियों को हासिल कर देश को गौरवान्वित किया है। यदि उन्हें ‘हवा परी’ की संज्ञा दी जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। उन्होंने देश के प्रति अपनी संवेदनाओं और भावना का इजहार करते हुए अपना आधा वेतन असम बाढ़ राहत कोष में भी देने का ऐलान किया है। संघर्षों और चुनौतियों से भरा उनका जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरक है। पूरे भारत को अपनी इस जांबाज खिलाड़ी पर नाज है।
संस्कृति चौधरी, सहरसा, बिहार

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