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चौपाल: मतदाता का मन

जीएसटी को लेकर दिल्ली का व्यापारी वर्ग भाजपा नाराज है।

Author Updated: February 3, 2020 1:39 AM
यह पैकेज देर से आया है, क्योंकि अब तक कोरोना से सोलह जानें जा चुकी हैं।

दिल्ली के सर्द मौसम में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है। हर दल अपनी जीत के लिए अथक प्रयास करते हुए कोई कमी नहीं छोड़ रहा। अपने-अपने स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारने का काम जारी है। ऐसे में यदि 2014 की लहर से हट कर अब धरातल पर बात करें तो पहली बार दिल्लीवासी भ्रमित नज़र आ रहे हैं कि किस ओर जाएं। दरअसल मामला यह है कि राजधानी में 2013 से पहले केवल दो दलों के बीच मुकाबला होता था, लेकिन अण्णा आंदोलन के बाद एक नए दल यानी आम आदमी पार्टी के उदय के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था। 2014 में जब मोदी लहर से बड़े-बड़े दलों व राजनेताओं का अस्तित्व खतरे में आ गया था, तब आम आदमी पार्टी ने ही इस लहर को भेदते हुए रिकॉर्ड तोड़ जीत हासिल की थी। अब फिर चुनाव हैं। ऐसे में खेल रोमांचक इसलिए हो रहा है, क्योंकि मौजूदा दिल्ली सरकार अपनी सत्ता को किसी भी हाल में फिर से हासिल करना चाहती है। वहीं कांग्रेस और भाजपा जैसे दल भी सत्ता हासिल करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

लेकिन अब सवाल यही है कि क्या तीनों दलों के लिए राष्ट्रीय राजधानी के किले भेदना आसान हैं? आम आदमी पार्टी की छवि उतनी बेहतर नहीं रह गई है। बीते कार्यकाल में दो दर्जन विधायक बागी हो चुके हैं। लेकिन केजरीवाल सरकार नें पिछले छह महीने में बिजली-पानी और वाई-फाई मुफ्त देकर जनता को अपनी ओर खींचने की कोशिश की है, जिससे गरीब व मध्यम वर्ग तबका बेहद प्रभावित हुआ है। महिलाओं में बसों में मुफ्त यात्रा और सुरक्षा की व्यवस्था भी की गई है। जबकि भाजपा ने लोकसभा में तो दोबारा शानदार जीत हासिल कर ली, लेकिन राज्यों में लगातार हार का सिलसिला जारी है। राष्ट्रीय स्तर पर हर अपनी कसौटी पर खरी उतरी रही भाजपा के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव बड़ी चुनौती बन गया है।

जीएसटी को लेकर दिल्ली का व्यापारी वर्ग भाजपा नाराज है। इसके अलावा इतने कानून बना दिए गए हैं जिससे व्यापार खत्म-सा हो गया। कांग्रेस के अपने अलग संकट हैं। पार्टी अपने पुराने कामों के हवाले दे रही है, लेकिन वोट हासिल करने के लिए ये काफी नहीं हैं। कांग्रेस अपने पुराने व कट्टर कार्यकर्ताओं को जुटाने में ही लगी है। शीला दीक्षित जैसा कोई चेहरा उसके पास नहीं है। इसलिए सबसे ज्यादा चुनौतियां कांग्रेस के समक्ष हैं। हालांकि पिछले दिनों कई राज्यों में गठबंधन के साथ सरकार बनाने के बाद एक सकारात्मक ऊर्जा भी आई हैं। बहरहाल,अब देखना यह है कि त्रिकोणीय मुकाबले में कौन बाजी मारता है।

’योगेश कुमार सोनी, दिल्ली

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