ताज़ा खबर
 

चौपाल: आखिरी इंसाफ

दरअसल, शाहबानो का मामला अपनी किस्म का इकलौता ऐसा मामला था जहां सत्तापक्ष ने उच्चतम न्यायालय के एक महत्त्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय को संविधान-संशोधन द्वारा बदलवा दिया था।

Author Published on: August 1, 2019 2:23 AM
triple talaq billराज्यसभा में पास हो चुका है तीन तलाक बिल। (फाइल फोटो)

तीस जुलाई 2019 का दिन इतिहास में दर्ज हो गया। तीन तलाक विधेयक को राज्यसभा ने अपनी मंजूरी दे दी। लोकसभा से इसे पहले ही मंजूरी मिल गई थी। सचमुच, महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाया गया यह एक अभूतपूर्व कदम है! तुष्टिकरण के चलते जो चिरप्रतीक्षित न्याय पिछली सरकारें नहीं दे पाई थीं, वह वर्तमान सरकार ने मुसलिम महिलाओं को दिला दिया है। विश्व के सबसे बड़े प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में ‘तीन तलाक’ का प्रावधान सच में एक बदनुमा दाग था जिसे अब हमारी संसद के दोनों सदनों ने बहुमत से साफ कर दिया है। देर आयद, दुरुस्त आयद। तीन तलाक प्रकरण पर पहले भी खूब विचार-मंथन हुआ था। शाहबानो के मामले से इस प्रकरण को जोड़ कर देखा जाए तो साफ होगा कि वर्तमान सरकार ने अपनी दृढ़ इच्छा-शक्ति के चलते मुसलिम महिलाओं को इस कानून से बड़ी राहत पहुंचाई है।

दरअसल, शाहबानो का मामला अपनी किस्म का इकलौता ऐसा मामला था जहां सत्तापक्ष ने उच्चतम न्यायालय के एक महत्त्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय को संविधान-संशोधन द्वारा बदलवा दिया था। नारी की अस्मिता, आत्म-निर्भरता, स्वतंत्रता और सशक्तिकरण का दम भरने वाले सत्तापक्ष ने कैसे मुसलिम वोटों की खातिर देश की सबसे बड़ी अदालत को नीचा दिखाया, यह इस प्रकरण से जुड़ी बातों से स्पष्ट होता है। बात कांग्रेस के शासन-काल की है जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री हुआ करते थे। गौरतलब है कि शाहबानो से उसके शौहर ने तीन बार ‘तलाक’ कह कर पिंड छुड़ा लिया था। शाहबानो ने अपने शौहर को कोर्ट में घसीट लिया कि ऐसे कैसे तलाक दोगे, गुजारा भत्ता दो! मियांजी बोले कि काहे का गुजारा भत्ता? शरीयत में जो लिखा है उस हिसाब से मेहर की रकम लेकर चलती बनो! शाहबानो कोर्ट में चली गर्इं। मामला सर्वोच्च न्यायालय तक गया और उसने शाहबानो के हक में फैसला सुनाते हुए उनके शौहर को हुक्म दिया कि अपनी बीवी को गुजारा भत्ता दे। यह सचमुच एक ऐतिहासिक फैसला था।

सर्वोच्च न्यायालय ने सीधे-सीधे शरीयत के खिलाफ एक मजलूम औरत के हक में फैसला सुनाया था। देखते-ही-देखते देश के इस्लामिक जगत में हड़कंप मच गया। उस समय की सरकार के प्रधानमंत्री राजीव गांधी मुसलिम नेताओं और कठमुल्लाओं के दबाव में आ गए और उन्होंने अपने प्रचंड बहुमत के बल पर संविधान में संशोधन कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटवा कर मुसलिम औरतों का हक मारते हुए शरीयत में न्यायपालिका के हस्तक्षेप को रोक दिया। बेचारी शाहबानो को कोई गुजारा भत्ता नहीं मिला। आशा की जानी चाहिए कि ‘तीन तलाक’ बिल के कानून बन जाने से सदियों से पीड़ित मुसलिम समुदाय की महिलाओं को न्याय के साथ-साथ उनका हक भी मिल जाएगा।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 चौपाल: कैसा समाज
2 चौपाल: बदलाव के अक्स
3 चौपाल: कश्मीर की बाधा
ये पढ़ा क्या?
X