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चौपालः जिम्मेदारी का अहसास

इस संकट काल में सोनिया गांधी जी से निवेदन है कि कांग्रेस पार्टी को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि राजनीति के वशीभूत सरकार का हौसला तोड़ा जाए।

यमुना का पानी साठ प्रतिशत तक साफ हो गया है।

बड़े-बड़े देश कारोना जैसी महामारी से जूझ रहे हैं। भले इस महामारी से निपटने का कोई विकल्प न निकल पा रहा हो, लेकिन सभी देश पूर्ण रूप से प्रयासरत हैं। कोरोना ने देश की अर्थव्यवस्था तो उथल-पुथल की ही है, साथ ही आम जन जीवन भी ठप कर दिया है। जबसे कोरोना के बचाव के लिए प्रधानमंत्री ने देश में संपूर्ण बंदी का ऐलान किया, तभी से लोग अपने अपने घरों में बंद हैं। इक्कीस दिनों की इस बंदी से हम कोरोना के संक्रमण को कम करने में तो शायद कामयाब हो जाएं, पर जो आर्थिक मंदी देश में आई है, उससे निकलने में शायद हमें सालों लग जाएंगे। फिलहाल एक जिम्मेदार नागरिक की तरह हमें प्रधानमंत्री और उन सभी की सहायता करनी चाहिए, जो हमारे लिए चिंता करे बगैर दिन-रात देश को इस महामारी से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। हमें तो बस इतना करना है कि अपने घरों में रहना है। अपने घर में रह कर हम इस महामारी को देश से जड़ से निकाल फेंकने में बहुत बड़ा सहयोग दे सकते हैं।
-स्वर्णिमा बाजपेयी, देहरादून

खिंचाई के बजाय साथ दें
कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने देश में कोरोना महामारी रोकने के लिए की गई पूर्ण बंदी पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार पूर्ण बंदी जरूरी तो थी, लेकिन इसे लागू ठीक से नहीं किया गया। इस संकट काल में सोनिया गांधी जी से निवेदन है कि कांग्रेस पार्टी को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि राजनीति के वशीभूत सरकार का हौसला तोड़ा जाए। माना जा सकता है कि सरकार को इस आकस्मिक संकट के समय कुछ कड़े और त्वरित फैसले लेने पर विवश होना पड़ा, जिसके कारण अनेक लोगों को बड़ी असुविधा हुई। लेकिन क्या तालाबंदी को और समय तक टालने से महामारी की विकरालता और भयावह नहीं होती? समझना होगा कि कुछ कठिनाइयां सहन करने से देश का अधिक हित हुआ है। सभी राजनीतिक दलों और अन्य विचारकों को तमाम राजनीतिक और वैचारिक मतभेद भुला कर देश पर आए विपत्तिकाल के विरुद्ध सरकार के हाथ मजबूत करें।
-सतप्रकाश सनोठिया, रोहिणी, दिल्ली

कड़ी कार्रवाई हो
कोरोना के कहर आगे समूचा विश्व बेबस है। कहीं अस्पतालों में अफरा-तफरी का माहौल है, तो कहीं इंसान सहमा हुआ प्रतीत होता है। एक वायरस के आगे आधुनिक वैज्ञानिक सभ्यता लाचार दिखाई पड़ती है। आज सभी देश इस आपदा से निपटने में जुटे हैं। भारत ने कोई कसर नहीं रख छोड़ी है, लेकिन संक्रमण अपना पांव पसारता ही जा रहा है। भारत में संक्रमण आने के पीछे विदेश से आए लोग जिम्मेदार हैं। अगर सरकार ने वक्त की नजाकत को समझते हुए विदेश में रह रहे भारतीयों की चिंता पहले की होती, तो आज देश पूर्ण बंदी नहीं झेल रहा होता। अब देश में जब संक्रमण प्रवेश कर चुका है, तब प्रयास जोर पकड़ने लगे हैं। दिल्ली में तबलीगी मरकज के आयोजन ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
-अली खान, जैसलमेर

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