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चौपाल: विशेष दर्जा क्यों

अगर कश्मीर को मिले विशेषाधिकार के बदले राष्ट्र को अमन चैन मिलता, वहां हर भारतीय अपने आपको सुरक्षित पाता तो भारत की उदारता सहनीय होती।

Author August 5, 2019 3:03 AM
जम्मू कश्मीर की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

संघीय भारत के हर राज्य को पूर्ण राजनीतिक संरक्षण देकर राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा करना केंद्र सरकार का दायित्व है। पाकिस्तान सहित कश्मीर का हर अलगाववादी घटक यह समझ ले कि भारत पाकिस्तान का भौगौलिक विभाजन मुस्लिम पाकिस्तान व धर्म निरपेक्ष हिंदुस्तान के रूप में हुआ था। यहां किसी क्षेत्र विशेष या वर्ग विशेष को विशेष दर्जा या सुविधा देना शेष राष्ट्र के नागरिकों के साथ अन्याय की श्रेणी में आता है। अगर कश्मीर को मिले विशेषाधिकार के बदले राष्ट्र को अमन चैन मिलता, वहां हर भारतीय अपने आपको सुरक्षित पाता तो भारत की उदारता सहनीय होती।

लेकिन उदारता के बदले पाक पोषित षड्यंत्रों से राष्ट्र की एकता-अखंडता को चुनौती देते षड्यंत्रों, आतंकी हमलों को क्यों और कब तक बर्दाश्त किया जाएगा? सवाल है कि खालिस्तान की मांग को सख्ती से दफन कर देने वाला राष्ट्र कश्मीर को और अतिरिक्त विशेषाधिकार देने की मेज पर क्यों बैठे? भारत के क्षेत्र विशेष के संप्रदाय विशेष को विशेषाधिकार या भूखंड निर्बाध क्यो दें? एक क्षेत्र विशेष के संप्रदाय विशेष की जातीयता आधारित मांग विखंडन का एक और घृणित लहुलुहान दरिया बहा देगी।
’अरविंद पुरोहित, रतलाम।

अपराधियों की राजनीति
भारतीय के लोकतंत्र में कितने शर्म और ग्लानि की बात है कि जो जनप्रतिनिधि देश की जनता की हिफाजत करने, उसके कष्टों के निवारण करने और खुशी-समृद्धि बढ़ाने के लिए के लिए चुना जाता है, वही बेटी तुल्य एक नाबालिग लड़की से बलात्कार जैसा घिनौना कुकृत्य कर बैठता है! और तो और उस बलात्कारी जनप्रतिनिधि के पक्ष में पुलिस, कोर्ट-कचहरी, जेल के अधिकारी पूरी ताकत के साथ खड़े हो जाते हैं। पुलिस पीड़िता की रिपोर्ट तक नहीं लिखती! उलटे उसके पिता को उठा कर जेल में बंद कर देती है जहां उसके संरक्षण में बलात्कारी का सगा भाई और अन्य गुंडे उस लड़की के पिता की इतनी बर्बर तरीके से पिटाई करते हैं कि उसकी मौत हो जाती है।

अंतत: उस पीड़िता को न्याय तब मिलता है जब वह मुख्यमंत्री के दरवाजे पर स्वयं पर तेल छिड़क कर आग लगा लेती है। ये है भारतीय लोकतंत्र के एक चुने हुए जनप्रतिनिधि का क्रूर चेहरा। यह कितनी बार लिखा जा चुका है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं, बलात्कारियों, माफियाओं, हत्यारों, दंगा फैलाने के कुत्सित प्रयास करने वालों ने ग्राम पंचायत से लेकर भारतीय संसद तक में पैठ बना ली है। जब तक इन अपराधियों और मॉफिया तत्वों का राजनीति से सफाया नहीं होगा, इस लोकतांत्रिक व्यवस्था की कोई सार्थकता नहीं है। इस लोकतंत्र को ग्रहण लग चुका है।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद

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