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चौपाल: गरीबी की जड़ें व हवा की कीमत

योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन न हो पाना भी इसकी एक प्रमुख समस्या है।

Author Published on: December 11, 2019 3:38 AM
सरकार, प्रशासन और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अकर्मव्यता गरीबी और को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका है।

गरीबी और भुखमरी एक दूसरे से संबंधित है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गरीबी रेखा के निर्धारण के तरीकों को लेकर हमेशा विवाद रहा है। नतीजतन, योजनाओं को लक्षित वर्ग तक पहुंचने में हमेशा कठिनाई आती रही है। कुपोषण की निरंतरता गरीबी और भुखमरी को और जटिल बना देता है। इसके चलते एक बहुत बड़ी जनसंख्या भुखमरी और गरीबी की जाल में फंसती चली जाती है।

उदारीकरण की नीतियों ने भी गरीबी और भुखमरी को बढ़ाया है। इसके परिणामस्वरूप असमानता के स्तर में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है, जिसने गरीबी और भुखमरी को जन्म दिया है। समस्या यह है कि इसे कैसे नियंत्रित किया जाए और आर्थिक विकास को किस तरह से गति प्रदान कर संसाधनों का वितरण सही तरीके से किया जाए । योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन न हो पाना भी इसकी एक प्रमुख समस्या है। सरकार, प्रशासन और समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अकर्मव्यता गरीबी और को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका है।

’विश्वजीत शुक्ला, पलामू, झारखंड

हवा की कीमत

हमारे देश में हर दिन एक नई सामाजिक समस्या जुड़ती जा रही है। लेकिन अब प्रकृति भी हमारा साथ छोड़ती नजर आ रही है। वायु प्राणी की प्राथमिकता है। लेकिन हालत यह है कि वायु की स्थिति बिगड़ती जा रही है और इसका हल किसी के पास नहीं है।

इस बात की परेशानी हर किसी को खाए जा रही है कि इसमें सुधार कैसे लाया जाए। सरकार ने भी अपनी तरफ से तमाम कोशिशें की हैं। काफी हद तक बेहतर परिणाम के आसार भी दिख रहे थे, मगर यह पूर्ण रूप से तभी खत्म होगा जब हर व्यक्ति अपना योगदान प्रदूषित वायु को कम करने में दे। लोगों के मन में खौफ तो उस दिन का है, जब शुद्ध हवा भी खरीदनी पड़ जाएगी। उस पल न जाने क्या होगा देश के उन लोगों का जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यह एक ऐसी समस्या है, जिसने सबको परेशान कर दिया है।

’निशा कश्यप, हरी नगर आश्रम, नई दिल्ली

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