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चौपाल: कब तक

राम मंदिर मुद्दा एक बार फिर गरमा रहा है। इस सबके बीच भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे को धार देने में लगी हुई है। वह प्रयागराज में कुंभ के मेले से आस्था के जरिये जनमानस को मथने की तैयारी में है ताकि राम मंदिर से मुकरने के विपक्षी दलों के आरोपों के बीच सियासी नफा हासिल कर सके।

Author November 9, 2018 3:57 AM
प्रतीकात्मक फोटो

राम मंदिर मुद्दा एक बार फिर गरमा रहा है। इस सबके बीच भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे को धार देने में लगी हुई है। वह प्रयागराज में कुंभ के मेले से आस्था के जरिये जनमानस को मथने की तैयारी में है ताकि राम मंदिर से मुकरने के विपक्षी दलों के आरोपों के बीच सियासी नफा हासिल कर सके। दरअसल, छोटी दिवाली के दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या जाकर फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या करने और सरयू तट पर भगवान राम की 151 मीटर ऊंची मूर्ति बनवाने का एलान किया। उन्होंने राम के नाम का दिया जलाने का आह्वान किया और साथ ही कहा कि जो अयोध्या चाहती है, उन्हीं भावनाओं से हम जुड़ने आए हैं। छोटी दिवाली पर उनका यह संदेश मिशन 2019 को साधने की कोशिश लगता है। सवाल है कि विकास की राजनीति के दावे करने वाली पार्टी आखिर कब तक बार-बार राम नाम पर निर्भर होती रहेगी?
’शशांक वार्ष्णेय, नई दिल्ली

उम्र से आगे
केरल की 96 वर्षीय करथियानी अम्मा और छत्तीसगढ़ 85 वर्षीय विजयलक्ष्मी ने यह साबित कर दिया कि उम्र कोई बाधा नहीं होती। केवल लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति होनी चाहिए किसी कार्य को करने के लिए। अम्मा ने साक्षरता मिशन के तहत कराई गई परीक्षा में 98 प्रतिशत अंक लाकर ‘पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती’ वाली बात चरितार्थ कर दी। वहीं साइकिल वाली दादी नाम से मशहूर विजयलक्ष्मी ने स्वस्थ रहने के लिए साइकिल का सहारा लिया जो उनके लिए किसी जड़ी-बूटी से कम साबित नहीं हुआ। ये दोनों ही उम्र का बहाना लेकर कुछ न करने वालों के लिए रोल मॉडल से कम नहीं!
’समरथ पाटीदार, रांकोदा, रतलाम

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