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चौपालः घटिया जांच किट

कोरोना विषाणु के इलाज में काम आने वाले मास्क, वेंटिलेटर, पीपीई, सेनिटाइजर, जांच किट आदि पर जीएसटी न वसूलने की मांग पहले से उठ रही है। मगर सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। विपक्ष ने भी इस मुश्किल घड़ी में कोरोना की जांच और इलाज से जुड़े सभी छोटे-बड़े उपकरणों को जीएसटी से मुक्त करने की मांग की है।

भारत के कई राज्यों से इस तरह की खबरें आई हैं कि कोरोना संक्रमण की जांच में उपयोग आने वाली चीनी किट असरदार नहीं है।

चीन ने भारत सहित दुनिया को जो कोरोना जांच किट बेचे हैं, उनमें से ज्यादातर खराब निकले। इटली, स्पेन जैसे यूरोपीय देश तो पहले ही इन्हें खारिज कर चुके थे। लेकिन इसके बावजूद भारत ने चीन से ये खरीदे। भारत के कई राज्यों से इस तरह की खबरें आई हैं कि कोरोना संक्रमण की जांच में उपयोग आने वाली चीनी किट असरदार नहीं है। इससे मरीजों की जांच प्रभावित हो रही है। पहले कोलकता, फिर राजस्थान से भी जांच किट की गुणवत्ता घटिया होने की शिकायत आई। इसके बाद इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने इन किटों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। ऐसे में सवाल यह है कि जो किट चाइना से आयात हुए, इससे जुड़े लोगों की जवाबदेही तय होगी या नहीं।

कोरोना विषाणु के इलाज में काम आने वाले मास्क, वेंटिलेटर, पीपीई, सेनिटाइजर, जांच किट आदि पर जीएसटी न वसूलने की मांग पहले से उठ रही है। मगर सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। विपक्ष ने भी इस मुश्किल घड़ी में कोरोना की जांच और इलाज से जुड़े सभी छोटे-बड़े उपकरणों को जीएसटी से मुक्त करने की मांग की है। यहां तक कि कुछ राज्य सरकारें भी केंद्र से मदद की गुहार लगा चुकी हैं। वैकल्पिक उपाय के तौर पर राज्य सरकारों को देश या देश से बाहर से उपकरण खरीदने की इजाजत देनी चाहिए।
-जयप्रकाश नवीन, नालंदा (बिहार)

योद्धा और चुनौती
दुनिया के दो सौ से ज्यादा देश कोरोना महामारी से ग्रस्त हैं। इस संकट में भारत में केंद्र और राज्य सरकारें पूरी ताकत के साथ इस महामारी का मुकाबला करने में लगी हैं। देश के स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी, पुलिसकर्मी और मीडिया के लोग अपनी जान जोखिम में डाल जनता को बचाने में लगे हैं। इन सभी पेशेवर लोगों के अलावा गैस एजेंसी के हॉकर, घरों में सामान की आपूर्ति करने वाले, बिजली-पानी जैसी आवस्यक सेवाओं से जुड़े लोग भी दिन-रात जनता की सेवा में जुटे हैं। इन सभी सेवाकर्मियों का अपने देश और देशवासियों के प्रति कर्तव्य, निष्ठा, जज्बे और राष्ट्रभक्ति के सामने जब दुनिया के सभी देश नसमस्तक हैं, तो दूसरी ओर हमारे देश के कुछ लोगों की वजह से इन सेवाकर्मियों को उनकी सेवा के बदले में दुर्व्यवहार, मारपीट और पथराव झेलना पड़ रहा है। तबलीगी मरकज के जमातियों ने नर्स को छेड़ने, डॉक्टरों पर थूकने, अभद्र टिप्पणी व बदतमीजी करने जैसी करतूतों से सबको शर्मसार किया है।

इन सभी कोरोना योद्धाओं के सामने स्वयं को कोरोना विषाणु के संक्रमण से दूर रखने की भी चुनौती है। देशभर में अब तक दो सौ से भी अधिक डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। कुछ की तो जान भी चली गई। मीडियाकर्मियों को ऐसे ही खतरों से रूबरू होना पड़ रहा है। मुंबई, इंदौर, चेन्नई जैसे शहरों में कई पत्रकार कोरोना संक्रमित हो गए। इसके अलावा पुलिस को जगह-जगह लोगों का गुस्सा झेलना पड़ रहा है। पुलिस इस समय सिर्फ जनता की सुरक्षा का ही कार्य नहीं कर रही है, बल्कि इसके अलावा देश के पुलिसकर्मी कोरोना संदिग्ध का पता लगाने, चिन्हित स्थानों की घेराबंदी करने, संदिग्ध व्यक्तियों को अस्पताल तक पहुंचाने, घर-घर सामान बंटवाने जैसे काम कर रहे हैं। इन सभी कामों के बाद भी पुलिस को लोगों को जागरूक करने, जमाती व कुछ धार्मिक कट्टरपंथी लोगों द्वारा की जा रही घिनौनी हरकतों को रोकने व उन्हें सबक सिखाने की चुनौतियां सामने हैं।

संकट के इस समय में ये सभी सेवाकर्मी मरीजों और जनता के लिए किसी भगवान से कम नहीं हैं। इन्होंने हमारी सुरक्षा व स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए अपनी जिंदगी को भी दांव पर लगा दिया हैं। ऐसे में देशवासियों को भी यह समझना होगा कि इन सभी सेवाकर्मियों का हमें आदर, सम्मान करना चाहिए। अगर ये सभी लोग अपना काम बंद कर देंगे, तो देशभर के करोड़ों लोगों को इसका दुष्परिणाम भुगतना पड़ सकता हैं।
-अखिल सिंघल, दिल्ली विवि, दिल्ली

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