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चौपाल: नया रास्ता

खास बात है कि सरकार लोगों की सोच बदलने और अपने विकास के लिए स्वयं-प्रेरित करने की दिशा में भी बढ़ी है। वित्तमंत्री ने अधिकार के साथ-साथ लोगों को अपना फर्ज निभाने के लिए प्रेरित किया है।

new delhiपीएम मोदी (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

केंद्र सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में अनेक जन-कल्याणकारी काम किए। उससे लोगों में अधिक अपेक्षाएं पैदा हुई हैं। वित्तमंत्री ने बजट में इनका खयाल रखा है। पानी, आवास, स्त्री सशक्तिकरण, स्वच्छता आदि क्षेत्रों में तय लक्ष्यों को पूरा करने का उन्होंने इरादा जताया। साथ ही, निजी क्षेत्र को बल प्रदान करने के उपाय किए हैं। इस दिशा में एक प्रमुख कोशिश लोगों को कंपनियों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने की है। बहरहाल, ये वे कदम हैं, जिनकी सरकार से लोगों को सामान्य अपेक्षाएं रहती हैं। खास बात है कि सरकार लोगों की सोच बदलने और अपने विकास के लिए स्वयं-प्रेरित करने की दिशा में भी बढ़ी है। वित्तमंत्री ने अधिकार के साथ-साथ लोगों को अपना फर्ज निभाने के लिए प्रेरित किया है। जाहिर है, सरकार परिचित लीक पर नहीं चल रही है बल्कि नई दिशा और नया रास्ता तलाशने के संकल्प पर आगे बढ़ रही है।
’हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर, बिहार

जीरो बजट खेती
देश में कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन और जल के कमी से जूझ रहा है। रासायनिक उर्वरकों पर आधारित खेती महंगी होती है और यह जमीन की उत्पादक क्षमता को कम करती है। रसायनयुक्तखाद्य मनुष्य के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं नतीजतन, कई बीमारियां जन्म ले रही हैं। इसके मद्देनजर सरकार ने जैविक खेती को महत्त्व देना शुरू किया है। सिक्किम वह पहला राज्य है जहां अब केवल जैविक खेती की जाती है। यह खेती खर्चीली है और इसमें पैदावार भी उम्मीद के मुताबिक नहीं होती। इसके अलावा जैविक अनाज की कीमत भी ज्यादा होने के वजह से केवल विशेष वर्ग के लोग उसे खरीद पाते हैं इसलिए केंद्र सरकार ने इस बार अपने बजट में जीरो बजट खेती की संकल्पना पेश की है।
जीरो बजट खेती पूरी तरह प्राकृतिक होती है जो देसी गाय के गोबर एवं मूत्र पर आधारित है। एक देसी गाय के गोबर एवं मूत्र से एक किसान तीस एकड़ जमीन पर जीरो बजट खेती कर सकता है। देसी गाय के गोबर एवं मूत्र से जीवामृत, घनजीवामृत और जामन बीजामृत बनाया जाता है। इनका खेत में उपयोग करने से मिट्टी के पोषक तत्त्वों में वृद्धि होती है और उपजाऊ जैविक गतिविधियों का विस्तार होता है। अब तक देश के चालीस लाख से ज्यादा किसान इस तरह की खेती से जुड़े हैं। किसानों की दशा सुधारने के लिए आधुनिक और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अमल में लाना उपयोगी है इसलिए सरकार का यह कदम स्वागतयोग्य है।
’निशांत महेश त्रिपाठी, कोंढाली, नागपुर

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