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चौपाल: आतंक की सत्ता व मिलावट का जहर

त्योहारों के मौसम में खाने-पीने की नकली और मिलावटी चीजें बेचने की होड़ लग जाती है।

Author Updated: October 16, 2019 2:31 AM
अठारह अक्तूबर को निर्णय आ जाएगा कि पाकिस्तान को ‘निगरानी सूची’ में ही रखा जाता है या उसे ‘गहन निगरानी सूची’ में डाला जाता है।

इस समय भारत की निगाहें पेरिस की तरफ हैं जहां वित्तीय कार्रवाई कार्यबल यानी एफएटीएफ की बैठक चल रही है। अठारह अक्तूबर को निर्णय आ जाएगा कि पाकिस्तान को ‘निगरानी सूची’ में ही रखा जाता है या उसे ‘गहन निगरानी सूची’ में डाला जाता है। अगर उसे ‘काली’ या ‘गहन निगरानी सूची’ में डाला जाता है तो यह भारत की बहुत बड़ी जीत होगी क्योंकि जून में हुई पिछली बैठक में भी उसे फिर से 40 मापदंड दिए गए थे। वैश्विक आतंक पर रोक लगाने के लिए पाकिस्तान को जो भी काम दिए गए थे, उनमें से वह केवल तीन काम कर पाया है। चौदह मामले में सिर्फ शुरुआत हुई है। बाकी में कुछ हुआ ही नहीं है।

इसका अर्थ यह हुआ कि पाकिस्तानी हुकूमत बिना आतंकी सहयोग के चल ही नहीं सकती। दहशतगर्दी ही वहां की राष्ट्रनीति है। शायद इमरान सरकार इसलिए भी बेफिक्र हैं कि इस समय एफएटीएफ के अध्यक्ष का पद चीन के पास है। अमेरिका को भी अफगानिस्तान में उसकी जरूरत है। सऊदी अरब और मलेशिया जैसे देश धर्म के आधार पर पाक का पक्ष लेंगे। इसलिए अनुमान है कि एक बार फिर से उसे ‘निगरानी सूची’ में ही रखा जाएगा।

’जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर

मिलावट का जहर

त्योहारों के मौसम में खाने-पीने की नकली और मिलावटी चीजें बेचने की होड़ लग जाती है। आज समाज में बहुत से ऐसे मुनाफाखोर लोग हैं जो अपने थोड़े से फायदे के लिए खाने-पीने की चीजों में मिलावट करके दूसरों की जान जोखिम में डाल देते हैं। खाने-पीने की मिलावटी चीजों का बच्चों की सेहत पर बहुत ज्यादा नकारात्मक असर पड़ता है और कई बार तो वे जानलेवा रोगों की गिरफ्त में फंस जाते हैं। इस सबके मद्देनजर स्वस्थ भारत के लिए खानपान की चीजों में मिलावट रोकना बहुत जरूरी है।

सरकार और प्रशासन को आमजन की सेहत की सुरक्षा के लिए गंभीरता दिखाते हुए बाजार में बिकने वाली चीजों की समय-समय पर जांच करनी चाहिए। वैसे सरकार मिलावटी या घटिया गुणवत्ता वाली चीजों से बचने के लिए जागरूकता चलाने के अलावा हेल्पलाइन भी समय-समय पर शुरू करती आई है। लेकिन जब तक लोग किसी वस्तु या खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता पर खुद ध्यान नहीं देंगे और किसी गड़बड़ी की शिकायत नहीं करेंगे तब तक सरकार के उपभोक्ता संरक्षण के प्रयास कामयाब नहीं हो सकते हैं।

’राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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